सावन में हरी चूड़ियां ही क्यों मानी जाती हैं शुभ? जानिए धार्मिक महत्व

नई दिल्ली। सावन आते ही बाजारों में हरी चूड़ियों, हरी साड़ियों और मेहंदी की रौनक भी बढ़ जाती है। सुहागिन महिलाओं की भीड़ ऐसे स्टॉल पर सबसे ज्यादा दिखती है। दुकानदार भी खास “सावन कलेक्शन” सजाते हैं। महिलाओं की हरे रंग के प्रति यह रुचि धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है। दरअसल, सावन का महीना बारिश और हरियाली का प्रतीक माना जाता है। बरसात के साथ ही सूखी धरती हरी चादर ओढ़ लेती है और चारों तरफ नई ऊर्जा और जीवन का एहसास होता है। इसी वजह से हरा रंग समृद्धि, खुशहाली, उन्नति और नई शुरुआत का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में हरे रंग का उपयोग करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का प्रकृति से गहरा संबंध माना जाता है। उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग और अन्य हरी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। वहीं माता पार्वती को सौभाग्य और सुहाग की देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं सावन में हरी चूड़ियां पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। सावन के दौरान हरियाली तीज जैसे प्रमुख त्योहार भी मनाए जाते हैं। इस दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और हरी चूड़ियों से श्रृंगार करती हैं। माना जाता है कि यह श्रृंगार माता पार्वती को प्रिय है और इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और मधुरता बनी रहती है सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, हरी चूड़ियों का सांस्कृतिक महत्व भी बहुत खास है। भारतीय परंपरा में चूड़ियां सुहाग की निशानी मानी जाती हैं। उनकी खनक घर में शुभता और आनंद का संदेश देती है। इसलिए सावन में महिलाएं नई हरी चूड़ियां पहनकर अपने परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

 

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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