पप्पू यादव की मानसिकता पाकिस्तान जैसी, संसद की सदस्यता निलंबित होनी चाहिए

सूरत। गुजरात के सूरत में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सनातन संस्कृति और साधु-संतों के कथित अपमान के मामले में विपक्षी दलों के सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित सांसदों की सदस्यता रद्द करने, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई। सीताराम दास महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सांसद पप्पू यादव ने जिस तरह से सनातन का अपमान किया है। वह दिखाता है कि भारत के नहीं पाकिस्तान से हैं, उनकी सोच पाकिस्तान जैसी है। उन्हें भारत में रहने का अधिकार नहीं है, वे चाहें तो पाकिस्तान जा सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि पप्पू यादव की संसद की सदस्यता रद्द की जाए। उन्होंने कहा कि भगवा रंग सनातन धर्म की आस्था, त्याग और तपस्या का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद सहित अनेक संतों ने भगवा धारण कर समाज का मार्गदर्शन किया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भगवा वस्त्र पहनते हैं। ऐसे में भगवा रंग को कथित रूप से बदनाम करने का प्रयास निंदनीय है। सीताराम दास महाराज ने आरोप लगाया कि कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए सनातन परंपराओं और संत समाज की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्र आंदोलन के दौरान केंद्रीय मंत्री से इस्तीफे की मांग की जा सकती है और आखिर में इस्तीफा भी आता है तो इस मामले में भी संबंधित सांसदों से जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। वीएचपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश नवाडिया ने कहा कि हाल ही में संसद परिसर में कुछ विपक्षी सांसदों, जिनमें बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद शामिल हैं, उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया, जिससे साधु-संतों और सनातन परंपरा का अपमान हुआ। उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में दानपेटी से चोरी के मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। उनका दावा है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में कोई साधु-संत शामिल नहीं था। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने पूरे संत समाज को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। दिनेश नवाडिया ने कहा कि राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि संबंधित सांसदों की सदस्यता रद्द की जाए तथा साधु-संतों के अपमान के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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