कांग्रेस सांसदों ने एनडीए सरकार पर युवाओं को गुमराह करने का लगाया आरोप

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसदों ने शुक्रवार को सदन में शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, संसदीय कार्यवाही और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के बयान को लेकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार युवाओं को गुमराह कर रही है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी बातों को अधिक महत्व देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन लोगों को जवाब देना चाहिए जो सरकार में हैं और जिन्हें संसद में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। खेड़ा ने सवाल उठाया कि क्या मोहन भागवत संसद के सदस्य हैं और कहा कि सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों को सदन में आकर जवाब देना चाहिए। वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा में सदस्यों की संख्या 815 तक पहुंचती है तो संसद प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि वर्तमान में 543 सांसदों के रहते ही सभी सदस्यों को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, ऐसे में अधिक सदस्यों वाली संसद बहस और चर्चा के लिहाज से और अधिक बेअसर साबित हो सकती है। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने सामाजिक असमानता और संसाधनों के वितरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति नैतिक आधार पर पीछे हटना चाहता है तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है। हालांकि, सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि समाज के गरीब और वंचित वर्गों तक आवश्यक संसाधन समान रूप से पहुंचें। उन्होंने कहा कि सरकार इस जिम्मेदारी को निभाने में असफल रही है, जिसके कारण समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता लगातार बढ़ रही है। कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल भाषण देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव कर शिक्षा, रोजगार और अन्य अहम मुद्दों पर ठोस कदम उठाने चाहिए। एक अन्य बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है और रोजगार के अवसरों में कमी आई है। इसके कारण युवा, मध्यम वर्ग और गरीब सभी वर्गों में निराशा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार अन्य मुद्दों के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वास्तविक जरूरत शिक्षा सुधार और रोजगार सृजन की है। साथ ही उन्होंने गृह मंत्री से संसद में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की मांग की। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। पीठासीन अधिकारी की इच्छा के बावजूद गृह मंत्री का सदन में उपस्थित न होना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक है। उन्होंने इसे सरकार के अहंकारी रवैये का संकेत बताया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि गृह मंत्री सदन से क्यों बच रहे हैं। गोगोई ने कहा कि राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्रों का हमेशा लोकतांत्रिक और नैतिक तरीके से समर्थन किया है। गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की गई, जिसके कारण देशभर में छात्रों में असंतोष बढ़ा है। उन्होंने कहा कि छात्र चाहते हैं कि गृह मंत्री संसद में आकर उनके खिलाफ हुई कार्रवाई पर जवाब दें, लेकिन सरकार इस मुद्दे से बचती हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि अब उन्हें इस विषय की गंभीरता समझ में आ रही है तो यह स्वागतयोग्य है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि केंद्र सरकार को भी इन बातों को स्वीकार करते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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