जापान: नॉन न्यूक्लियर पॉलिसी को लेकर पीएम कार्यालय ने गठबंधन के साथी को दिया सुझाव

टोक्यो। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) से देश के लंबे समय से चले आ रहे नॉन-न्यूक्लियर (गैर-परमाणु) सिद्धांतों पर फिर से सोचने के लिए “एक कदम और आगे बढ़ने” को कहा है। जापान के तीन नॉन-न्यूक्लियर सिद्धांतों का मतलब है “देश में न्यूक्लियर हथियार न रखना, न बनाना और न लाने की इजाजत देना।” इस साल जून में, सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) गठबंधन के सबसे छोटे (संख्या के आधार पर) साथी जेआईपी ने देश के तीन खास सिक्योरिटी डॉक्यूमेंट्स में बदलाव करने के लिए प्रधानमंत्री साने ताकाइची को एक प्रस्ताव दिया था। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में जापान में न्यूक्लियर हथियार न लाने की इजाजत देने के सिद्धांत का “यथार्थवादी समीक्षा” करने की बात कही गई थी। मेनिची शिंबुन की एक रिपोर्ट में जेआईपी के एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “एलडीपी पर हर तरह के बोझ हैं, और कुछ बातें ऐसी हैं जो वह खुद नहीं कह पा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि हम चाहते हैं कि आप एक कदम और आगे बढ़ें।” प्रस्ताव में कहा गया कि अमेरिका के “एक्सटेंडेड न्यूक्लियर डिटरेंस” यानी विस्तारित परमाणु सुरक्षा कवच का असर बढ़ाने के लिए जापान को अमेरिका से सलाह-मशविरा करना चाहिए और जरूरी कदम उठाने चाहिए। यह भी पता चला कि प्रस्ताव पेश करने से पहले, जेआईपी के कई वरिष्ठ जनों, जिनमें सह प्रतिनिधि फुमिताके फुजिता भी शामिल थे, ने रक्षा मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी काज़ुहिसा शिमाडा और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के पूर्व प्रमुख कियोफुमी इवाता के साथ गुप्त बातचीत की थी। प्रस्ताव में शिमाडा के विचारों को लगभग हूबहू अपनाया गया। मैनिची शिंबुन के अनुसार, तीन नॉन-न्यूक्लियर सिद्धांतों पर दोबारा विचार की मांग की एक बड़ी वजह अमेरिका की नई समुद्र-आधारित क्रूज मिसाइल है। परमाणु हथियार से लैस मिसाइल की मारक क्षमता 2,000 से 2,500 किमी तक है और इसे 2032 के बाद तैनात किया जाना है। ये युद्धपोत जापान के आसपास के पानी में गश्त कर सकते हैं और योकोसुका स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर भी रुक सकते हैं। खुद प्रधानमंत्री ताकाइची ने भी प्रधानमंत्री बनने से पहले संकेत दिए थे कि वो “न्यूक्लियर हथियार न लाने” वाले सिद्धांत को बदलना चाहती हैं। मैनिची शिंबुन ने जेआईपी के हवाले से कहा कि, प्रस्ताव तैयार करते समय, पार्टी ने “प्रधानमंत्री के करीबी लोगों के साथ बातचीत बनाए रखी थी।” उनमें मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा और सुरक्षा नीति पर प्रधानमंत्री के विशिष्ट सलाहकार सदामासा ओउए शामिल थे।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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