30 अगस्त का पंचांग: भगवान विष्णु और कृष्ण की आराधना फलदाई, दोपहर 12:02 बजे से 12:52 बजे तक अभिजित मुहूर्त

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 30 अगस्त 2026 (रविवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि सुबह 9:37 बजे तक रहेगी। इसके बाद तृतीया शुरू हो जाएगी। भाद्रपद मास भगवान विष्णु और कृष्ण की आराधना के लिए बहुत पवित्र माना जाता है, रविवार होने से सूर्य देव की पूजा करना फलदाई रहेगा। रविवार को सुबह 6:12 बजे सूर्योदय और शाम 6:42 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 8:01 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 8:49 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 30 अगस्त 2026 को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा अगले दिन तड़के 3:44 बजे उत्तर भाद्रपद नक्षत्र रहेगा, इसके बाद रेवती नक्षत्र शुरू हो जाएगा। रविवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि इस दिन शूल योग रहेगा, जो अगले दिन सुबह 3:46 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल रात 11:08 से रात 12:44 बजे तक रहेगा। वहीं, राहुकाल शाम 5:09 बजे से 6:42 बजे और गुलिक काल दोपहर 3:35 से 5:09 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 12:27 से 2:01 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है। रविवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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