राज ठाकरे ने की एसआईआर रद्द करने की मांग, बैलेट पेपर से मतदान की वकालत

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी परिणामों में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने विपक्षी दलों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के स्थान पर कागजी मतपत्रों से मतदान प्रणाली को वापस लाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने का भी आह्वान किया। राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक बयान में सत्ताधारी पार्टी पर प्रमुख संस्थागत हस्तियों का इस्तेमाल करके सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने का आरोप लगाया और देशभर की सभी विपक्षी पार्टियों से कागजी मतपत्रों को वापस लाने के लिए एक व्यापक आंदोलन में एकजुट होने का आह्वान किया। राज ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर बढ़ती सार्वजनिक और राजनीतिक जांच के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पिछले दो दिनों से चुप हैं। ठाकरे ने एसआईआर प्रक्रिया को 2025 से मतदाता सूचियों में हेरफेर करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा नया हथियार बताते हुए कहा कि अब चुनाव आयोग के भीतर से भी गंभीर चिंताएं उठाई जा रही हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली जनता के विश्वास को कमजोर करती है, ठाकरे ने सभी राजनीतिक दलों से एक राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया, जिसमें मांग की जाए कि भविष्य के सभी चुनाव सख्ती से पारंपरिक कागजी मतपत्रों के माध्यम से कराए जाएं। उन्होंने कहा, “वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द किया जाना चाहिए, सामने आई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उसके बाद ही एक नई सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।” ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से इस प्रक्रिया के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया और तर्क दिया कि चुनावी पारदर्शिता केवल मतपत्र मतदान के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्‍होंने कहा, “जब हम इस भ्रष्ट प्रक्रिया को समाप्त करके मतपत्र मतदान की ओर लौटेंगे, तभी सत्ता पर इस लंबे समय से चले आ रहे कब्जे के पीछे का पूर्ण सत्य उजागर होगा।” ठाकरे के इस बयान ने चुनाव आयोग के भीतर असहमति की हालिया खबरों के बाद बढ़ते राजनीतिक तूफान को और हवा दे दी है। विपक्षी दल लगातार इस दावे को लेकर एकजुट हो रहे हैं कि चुनाव निकाय की संस्थागत स्वतंत्रता से समझौता किया गया है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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