नई दिल्ली। नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है जिन्हें सभी सिद्धियों को देने वाली देवी माना गया है। वो भक्तों को ज्ञान, आरोग्य और नई ऊर्जा देती हैं। आयुर्वेद में मां सिद्धिदात्री का संबंध एक बहुत ही खास औषधि से जोड़ा गया है – शतावरी। मान्यता है कि जिस तरह मां सिद्धिदात्री सौ तरह की सिद्धियां देती हैं, उसी तरह शतावरी भी शरीर को सौ तरह की ताकत देती है। इसीलिए इसका नाम शतावरी पड़ा। आयुर्वेद में शतावरी को एक महत्वपूर्ण रसायन औषधि माना जाता है। रसायन का अर्थ ऐसी औषधियों से है, जिनका पारंपरिक रूप से शरीर के पोषण, ताकत और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उपयोग किया जाता है। शतावरी की जड़ का इस्तेमाल आयुर्वेदिक चिकित्सा में खास तौर पर किया जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में शतावरी को मधुर और तिक्त रस वाली, शीतल प्रकृति की तथा शरीर को पोषण देने वाली औषधि बताया गया है। ताकत और इम्युनिटी के लिए : शतावरी एक बेहतरीन रसायन है। मतलब ये शरीर को अंदर से जवान और ताकतवर बनाती है। अगर आपको हर समय थकान लगती है, कमजोरी महसूस होती है या वजन बहुत कम है, तो शतावरी बहुत फायदा करती है। ये शरीर के रोगों से लड़ने की ताकत को बढ़ाती है। महिलाओं के लिए वरदान : महिलाओं के लिए तो शतावरी किसी वरदान से कम नहीं है। आजकल पीसीओडी, पीसीओएस और पीरियड्स का अनियमित होना बहुत आम समस्या हो गई है। शतावरी हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद करती है। इसके अलावा जिन माताओं को बच्चे को दूध पिलाने में दिक्कत होती है, उनके लिए ये दूध बढ़ाने का काम भी करती है। दिमाग को शांत रखने में : शतावरी में एडेप्टोजेनिक गुण होते हैं। ये स्ट्रेस को कम करती है। अगर आपको टेंशन, घबराहट या रात में नींद न आने की परेशानी है, तो शतावरी दिमाग को ठंडक पहुंचाती है और अच्छी नींद लाने में मदद करती है। ये याददाश्त को भी तेज करती है। पेट के लिए अच्छी : जिन लोगों को एसिडिटी, पेट में जलन या अल्सर की शिकायत रहती है, उनके लिए शतावरी ठंडक का काम करती है। ये आंतों की सूजन को कम करती है और पाचन को ठीक रखती है। एंटी-एजिंग गुण : इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नई बनाते हैं और बुढ़ापा जल्दी आने से रोकते हैं। आंखों की रोशनी के लिए भी इसे अच्छा माना गया है। ये तीनों दोषों – वात, पित्त और कफ को संतुलित रखती है।











