भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 143 अंक फिसला

 मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 143.21 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 73,709.69 और निफ्टी 77.60 अंक या 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,811.35 पर था। लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में अधिक बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 922.10 अंक या 1.58 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57,565.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 448.45 अंक या 2.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,487.30 पर था। बाजार में सबसे अधिक दबाव डिफेंस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल स्टॉक्स में देख गया। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.49 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.86 प्रतिशत) और निफ्टी मेटल (1.71 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ लूजर्स थे। निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑटो, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी पीएसई भी लाल निशान में बंद हुए। केवल निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज ही हरे निशान में बंद हुए। सूचकांकों में एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, पावर ग्रिड, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक गेनर्स थे। बजाज फाइनेंस, इटरनल, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, बीईएल, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, टाइटन, एसबीआई, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक और एलएंडटी लूजर्स थे। बाजार के जानकारों ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों में शुरुआती बढ़त टिक नहीं पाई। इसकी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और एफआईआई की लगातार बिकवाली थी। ऑटो, फाइनेंशियल, मेटल और रियल्टी सेक्टर में मुनाफावसूली तेज रही, जो महंगाई और मार्जिन के दबाव को लेकर चिंताएं दिखाती है। वहीं, बेहतर कमाई की संभावनाओं और निवेशकों की नई दिलचस्पी के चलते आईटी सेक्टर ने काफी मजबूती दिखाई। वहीं, दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों का अच्छा निवेश बाजार को सहारा दे रहे हैं, लेकिन बाजार का कमजोर दायरा और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली सतर्क रहने का संकेत देती है। बाजार की निकट भविष्य की दिशा कंपनियों के नतीजों, व्यापार वार्ता में प्रगति और विदेशी निवेश के प्रवाह पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, बाजार में स्थिरता के लिए कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक यील्ड और करेंसी में उतार-चढ़ाव का कम होना बहुत जरूरी है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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