अमरनाथ यात्रा में यात्रियों के लिए यात्रा को सुगम बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मनोज सिन्हा

 नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि अमरनाथ यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए सुगम और परेशानी-मुक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैंने आज जम्मू में भगवती नगर यात्री निवास का दौरा किया ताकि श्री अमरनाथ जी यात्रा के लिए मौजूद सुविधाओं और सेवाओं का जायजा ले सकूं। पवित्र यात्रा में सिर्फ 12 दिनों में ही 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हो चुके हैं, इसलिए यात्रियों के लिए यात्रा को सुगम और परेशानी-मुक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, सुरक्षा बलों, श्राइन बोर्ड और सिविल प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान, मैंने उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की और उनसे आग्रह किया कि वे हर यात्री के साथ एक दिव्य अतिथि जैसा व्यवहार करें। मैंने बाबा बर्फानी के सभी भक्तों के लिए त्रुटिहीन पंजीकरण, आरामदायक ठहरने की व्यवस्था और सुगम यात्रा इंतजाम सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मैंने जम्मू को प्रदर्शित करने पर भी बल दिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जम्मू डिवीजन के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए भ्रमण कार्यक्रम आयोजित करें, साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दें। उन्होंने लिखा कि हमारा लक्ष्य है कि जब भी बाबा अमरनाथ के यात्री घर लौटें, तो वे अपने साथ जम्मू की सुंदर स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुओं और अविस्मरणीय यादों के रूप में जम्मू का एक अंश लेकर जाएं। हम सब मिलकर इस वर्ष की यात्रा को वास्तव में ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लेते हैं। राजौरी का जिक्र करते हुए एलजी ने एक पोस्ट में लिखा कि राजौरी के लिए गर्व का पल है। जिले की ऐतिहासिक ‘भैरव यात्रा’ को आधिकारिक तौर पर भारत की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची’ में शामिल किया गया है। इस सपने को सच करने के लिए राजौरी जिला प्रशासन और जम्मू-कश्मीर के संस्कृति विभाग को बधाई। यह प्रतिष्ठित सम्मान इस क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों को दर्ज करने, संरक्षित करने और उन्हें मनाने की दिशा में बहुत मददगार साबित होगा। उन्होंने आगे लिखा कि यह राष्ट्रीय सम्मान उन पीढ़ियों के भक्तों के प्रयासों को मान्यता देता है जिन्होंने इस परंपरा को जीवित रखा। ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची’ में ‘भैरव यात्रा’ को शामिल किए जाने से राष्ट्रीय स्तर पर राजौरी की अनूठी सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी। साथ ही, इससे शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और टिकाऊ विरासत पर्यटन के नए रास्ते खुलेंगे।

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