नई दिल्ली। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने महिला कल्याण योजनाओं, उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा, दिल्ली में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, आरएसएस के पंजीकरण को लेकर चल रही बहस, घुसपैठ, हिजाब और वंदे मातरम जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों और असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करना है, जबकि विपक्ष को पहले अपने शासन और पुराने बयानों पर नजर डालनी चाहिए। अखिलेश यादव द्वारा महिलाओं के सम्मान और कल्याण से जुड़ी योजना की बात किए जाने पर आरपी सिंह ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को यह भी याद करना चाहिए कि उनके शासन के दौरान उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति को लेकर किस तरह के सवाल उठते थे। उन्होंने कहा कि महिला के लिए सबसे पहली जरूरत सुरक्षा है। यदि कोई महिला सुरक्षित होकर घर से बाहर नहीं निकल सकती तो केवल आर्थिक सहायता या योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है। आरपी सिंह ने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ सरकार में उत्तर प्रदेश की महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा मिला है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं और बेटियां रात में भी अपने काम के लिए घर से बाहर निकल सकती हैं। भाजपा प्रवक्ता ने इसे राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार का उदाहरण बताया। दिल्ली में महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता देने के भाजपा के चुनावी वादे का उल्लेख करते हुए आरपी सिंह ने कहा कि सरकार ने इस दिशा में अपना वादा पूरा करने की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने दिल्ली में दिल्ली लक्ष्मी योजना शुरू करने का वादा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के अनुरूप दिल्ली सरकार ने योजना की शुरुआत की है और करीब 4,000 महिलाओं को सम्मान निधि की राशि दी गई है। आने वाले समय में यह आर्थिक सहायता करीब 16 लाख महिलाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने इसे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताया। महिला कल्याण योजनाओं को केवल चुनावी वादे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता और आत्मनिर्भरता का आधार उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। आरएसएस के पंजीकरण को लेकर कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे की टिप्पणी पर आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता ने स्वयं यह माना है कि आरएसएस के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने इसे तथ्य के तौर पर प्रस्तुत करते हुए कहा कि संघ के खिलाफ इस संबंध में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। आरएसएस देश के कानून के तहत काम करता है और यदि कोई संगठन पंजीकरण या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया से संबंधित सवाल उठाता है तो उसके लिए देश के कानून और संबंधित नियमों को देखना चाहिए। आरएसएस की गतिविधियों को लेकर बहस करने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कानून क्या कहता है और संगठन किस कानूनी व्यवस्था के तहत काम कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा प्रवक्ता ने सरकार के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने स्पष्ट प्रतिबद्धता जताई है कि देश में रहने वाले ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो भारत के नागरिक नहीं हैं और कानून के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अवैध घुसपैठ का असर देश की डेमोग्राफी पर पड़ सकता है और इससे देश के उपलब्ध संसाधनों पर भी दबाव बढ़ता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि नागरिकता और अवैध प्रवास से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करे। देश की सीमाओं और संसाधनों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब से जुड़े फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी को लेकर आरपी सिंह ने कहा कि ओवैसी एक अच्छे वकील हैं और यदि उन्हें अदालत के फैसले से कोई आपत्ति है तो उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। यदि किसी पक्ष को हाई कोर्ट के फैसले से असहमति है तो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से इस तरह के मामलों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। हिजाब के धार्मिक रूप से अनिवार्य होने के सवाल पर आरपी सिंह ने कहा कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं है। उन्होंने दुनिया के कई मुस्लिम बहुल देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी हिजाब को लेकर अलग-अलग सामाजिक और कानूनी व्यवस्थाएं देखने को मिलती हैं। असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर भी आरपी सिंह ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर समुदाय का अपना नेतृत्व है और मुस्लिम समुदाय का भी नेतृत्व होना चाहिए। ओवैसी ने मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान को मजबूत करने से जोड़ते हुए संसद में मुस्लिम सांसदों की संख्या का मुद्दा उठाया था। इस पर आरपी सिंह ने कहा कि भारत में विभिन्न राजनीतिक दल मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारते हैं और उनमें से कुछ उम्मीदवार चुनाव जीतकर संसद में भी पहुंचते हैं। भारतीय लोकतंत्र में सांसदों का चुनाव केवल किसी समुदाय की आबादी के प्रतिशत के आधार पर नहीं होता। चुनाव क्षेत्र, उम्मीदवार, राजनीतिक दल और मतदाताओं के वोट के आधार पर परिणाम तय होता है। यदि किसी समुदाय के प्रतिनिधित्व की बात की जाती है तो यह भी देखना होगा कि राजनीतिक दल कितने उम्मीदवार उस समुदाय से उतारते हैं और चुनाव में जनता उन्हें किस तरह समर्थन देती है। वंदे मातरम को लेकर ओवैसी की टिप्पणी पर आरपी सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर अब कोई किंतु-परंतु नहीं होना चाहिए। वंदे मातरम के गायन के दौरान सम्मान में खड़ा होना आवश्यक है। जब वंदे मातरम गाया जाएगा तो लोगों को सम्मान में खड़ा होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति इसकी अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है।











