केंद्र सरकार ने ‘ड्रग्स फ्री भारत’ बनाने के लिए तैयार किया तीन साल का रोडमैप : अमित शाह

गोवा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गोवा में कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ अगले तीन वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। शाह ने कहा कि इस अभियान के चार प्रमुख स्तंभ होंगे- इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, डिमांड एवं हार्म रिडक्शन तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय। जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश की कमान संभाली, उस समय भारत के सामने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद, नक्सलवाद तथा पूर्वोत्तर में सक्रिय विभिन्न हथियारबंद गुट प्रमुख थे। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में बम धमाकों जैसी घटनाएं भी चुनौती बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2019 से अब तक आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अलगाववाद की भावना में कमी आई है और आतंकवाद पर भी प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और वहां के लोगों तथा देश के बाकी हिस्सों के बीच की दूरी कम करने के प्रयास किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या अब समाप्ति की ओर है। जिन लोगों ने तिरुपति से पशुपतिनाथ तक ‘रेड कॉरिडोर’ बनाने का सपना देखा था, उनमें से कई लोगों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में लौटने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पूर्वोत्तर में भी लगभग 10,000 युवाओं ने हथियार छोड़े हैं। केंद्र सरकार ने विभिन्न संगठनों के साथ 14 से अधिक समझौते किए हैं और पूर्वोत्तर अब विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमित शाह ने कहा कि 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण कर उन्हें भारत की अदालतों के समक्ष लाया गया है। पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए जबकि जुलाई 2026 तक 182 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। ‘भारतपोल’ के माध्यम से 14 से अधिक एजेंसियों को जोड़ा गया है। वर्ष 2019 से 2026 तक लगभग 17,874 करोड़ रुपए की संपत्तियां भगोड़े अपराधियों से संबंधित मामलों में सील की गई हैं। नए आपराधिक कानूनों और नई न्याय संहिताओं के जरिए भी भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि सीबीआई, विदेश मंत्रालय और इंटरपोल भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने का काम करेंगे। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और बैंकिंग सिस्टम पैसों के लेनदेन का पता लगाने का काम करेंगे। प्रत्येक एजेंसी के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं और उन्हें पूरा करने के लिए तिमाही समय सीमा भी तय की गई है। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के पुनर्वास के लिए ‘मानस हेल्पलाइन’ (1933) शुरू की गई है। इसके साथ ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के कैडर का पुनर्गठन किया गया है। निदान पोर्टल के माध्यम से नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है। सीसीटीएनएस डेटा और इंटीग्रेटेड डेटा फ्यूजन का इस्तेमाल करते हुए ड्रग्स के हॉटस्पॉट, अपराध के तौर-तरीकों और जब्ती की घटनाओं का देशव्यापी डेटा आधारित नक्शा तैयार किया गया है। सरकार ने ड्रग्स नेटवर्क की जांच के लिए ‘नीचे से ऊपर’ और ‘ऊपर से नीचे’ दोनों तरीकों को अपनाया है। यदि ड्रग्स का छोटा पैकेट भी बरामद होता है, तो उसके स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाती है। वहीं, सीमा पर ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़े जाने पर उसके स्रोत से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरे नेटवर्क की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। नशीले पदार्थों का कारोबार आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करता है। इसके अलावा ड्रग्स के कारोबार से अर्जित काले धन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी किया जाता है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में ‘नार्को-टेरर’ मॉड्यूल को बढ़ावा मिलता है। वर्ष 2019 से सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सिस्टम में बदलाव, ड्रग्स नेटवर्क को तोड़ना, वित्तीय कड़ियों पर कार्रवाई और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इससे बाहर निकालने के लिए सहायता प्रदान करना शामिल है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दौरान जब्त किए गए ड्रग्स के विनष्टीकरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2004-14 के दौरान 3.36 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए थे जबकि 2014-26 के दौरान 48.68 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए। उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 के बीच 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए थे जबकि 2014-26 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 1.19 करोड़ किलोग्राम हो गया। मोदी सरकार के दौरान जब्त किए गए ड्रग्स की अनुमानित कीमत 1.89 लाख करोड़ रुपए रही जबकि 2004-14 के दौरान यह आंकड़ा करीब 40 हजार करोड़ रुपए था।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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