चीन में हरित आर्थिक विकास और वन क्षेत्र के विस्तार पर दिया जा रहा ध्यान

बीजिंग। चीन लगातार पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए भी चीन काम कर रहा है। इससे पता चलता है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए वह अपनी भूमिका निभा रहा है। चीन ने हाल के वर्षों में अपने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए व्यापक उपाय किए हैं। शहरों में ग्रीन कवर में इजाफा देखा गया है। साथ ही भविष्य को लेकर भी योजना बनायी जा रही है, जिसके तहत वानिकी और घास के मैदानों वाले क्षेत्रों में उच्च-गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि चीन का राष्ट्रीय वानिकी और ग्रासलैंड प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से जुटा हुआ है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और हरित आर्थिक विकास के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा सके। बताया जाता है कि चीन ने वर्ष 2030 तक अपने वानिकी और घास के मैदानों से जुड़े उद्योगों के कुल उत्पादन मूल्य को 14 ट्रिलियन युआन तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान यह 11 ट्रिलियन युआन था। इस तरह चीन पर्यावरण संरक्षण और हरित आर्थिक विकास के बीच बेहतर सामंजस्य बिठाने को लेकर प्रतिबद्ध लगता है। यह लक्ष्य चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-30) के लिए वानिकी और घास के मैदानों के संरक्षण और उपयोग की योजना में तय किया गया है। इस योजना को राष्ट्रीय विकास व सुधार आयोग, वित्त मंत्रालय और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने मिलकर जारी किया है। इस योजना का उद्देश्य उच्च-स्तरीय संरक्षण के माध्यम से वानिकी और घास के मैदानों के क्षेत्रों में उच्च-गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देना है। इसमें इकोसिस्टम की गुणवत्ता में सुधार, पारिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत करने और वन व घास के मैदानों के संसाधनों से मिलने वाले सार्वजनिक लाभों को बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार और संबंधित मंत्रालय ने इसमें साल 2030 तक देश के वन क्षेत्र को 25.8 प्रतिशत तक बढ़ाने और वन स्टॉक की मात्रा को 22.4 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ध्यान रहे कि पिछली पंचवर्षीय योजना के दौरान, चीन का वन क्षेत्र 25 फीसदी से अधिक हो गया, जबकि वन स्टॉक की मात्रा लगभग 21 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई। इससे देश समय से पहले ही 2030 के लिए अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम हो गया। यह दर्शाता है कि चीन द्वारा लगातार वन कवर का विस्तार करने और हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह अपने आप में बड़ी बात है कि चीन ने चार दशकों से अधिक समय से वन क्षेत्र और वन स्टॉक की मात्रा दोनों में वृद्धि बनाए रखी है, जबकि रेगिस्तान में बदल रही और रेतीली भूमि के क्षेत्रों में लगातार कमी हासिल की है। नई योजना में बड़े पैमाने पर हरित कार्यक्रमों को जारी रखने का आह्वान किया गया है, साथ ही इस बात पर जोर दिया गया है कि वृक्षारोपण और पारिस्थितिक बहाली का काम स्थानीय भूमि और जल की स्थितियों के अनुसार किया जाना चाहिए। इसमें वन और घास के मैदानों की गुणवत्ता में सुधार करने और खराब हो चुके घास के मैदानों को बहाल करने, आर्द्रभूमि की रक्षा करने और रेगिस्तान बनने की प्रक्रिया, चट्टानी रेगिस्तान बनने और मिट्टी के कटाव से निपटने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया है। जैसा कि हम जानते हैं कि चीन एक बड़ा देश है, क्षेत्रफल के लिहाज से भी विशाल है, ऐसे में अगर वृक्षारोपण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है तो इसका असर व्यापक रूप से नजर आएगा।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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