जम्मू विश्वविद्यालय में एलजी सिन्हा का संदेश, एआई के दौर में भी फैसले इंसानों के हाथ में रहने चाहिए

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि तकनीक शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन यह निश्चित रूप से शिक्षक की भूमिका को बदल देगी। उपराज्यपाल सिन्हा ने मंगलवार को जम्मू विश्वविद्यालय में आधुनिक खेल परिसर, शूटिंग रेंज, क्रिकेट स्टेडियम के लिए हाई-मास्ट लाइट और लगभग 10 करोड़ की लागत से विकसित तवी गेस्ट हाउस परिसर समेत कई सुविधाओं का उद्घाटन किया। उपराज्यपाल ने कहा कि ये सुविधाएं विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों, विद्वानों और आगंतुकों को सशक्त बनाएंगी और केंद्रशासित प्रदेश में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत करेंगी। उपराज्यपाल ने कुलपति और हितधारकों को बधाई देते हुए इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी संस्थान का सच्चा परिवर्तन उसके भीतर पोषित मूल्यों, विचारों और नवाचारों में निहित है। उन्होंने श्रोताओं को याद दिलाया कि हर पीढ़ी में बदलाव होता है, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित वर्तमान युग में परिवर्तन की तीव्रता अभूतपूर्व है। अपने संबोधन में उपमहामहिम ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के युग में शिक्षित होने का क्या अर्थ है? उन्होंने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती शक्ति के बारे में वैश्विक चिंताओं को उजागर किया। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई, एक बहुआयामी तकनीक होने के नाते, स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकती है, जिससे लाभकारी और हानिकारक दोनों परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि तकनीक को मानवता का सेवक बने रहना चाहिए, उन्होंने कहा कि मानवीय गरिमा, आजीविका, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले निर्णय हमेशा जिम्मेदार मनुष्यों द्वारा लिए जाने चाहिए, न कि मशीनों द्वारा। उन्‍होंने कहा, “जिस दिन प्रौद्योगिकी मानवता की स्वामी बन जाएगी, हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। मशीनें गणना कर सकती हैं, लेकिन वे भावनाएं नहीं व्यक्त कर सकतीं। मशीनें भविष्यवाणी कर सकती हैं, लेकिन वे निर्णयों की जिम्मेदारी नहीं उठा सकतीं। मशीनें करुणा की भाषा की नकल कर सकती हैं, लेकिन वे आधी रात को किसी मरीज के बिस्तर के पास नहीं खड़ी होतीं, न ही वे न्यायाधीश के फैसले का नैतिक भार वहन कर सकती हैं। उपराज्यपाल ने कहा, “मेरा स्पष्ट मत है कि प्रत्येक निर्णय जो किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता, आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा या गरिमा को गहराई से प्रभावित करता है, उसके पीछे एक इंसान का होना आवश्यक है, जो निर्णय को समझता हो, उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करता हो और उसे जवाबदेह ठहराया जा सके।” मनोज सिन्‍हा ने उच्च शिक्षा के लिए पांच महत्वपूर्ण चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रासंगिकता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और पाठ्यक्रम को परिवर्तन की गति के अनुरूप तेजी से अनुकूलित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को मौलिक उत्तर देने चाहिए, जिज्ञासा और तर्क को प्राथमिकता देनी चाहिए और प्रौद्योगिकी को ग्रामीण और शहरी शिक्षार्थियों के बीच की खाई को नहीं बढ़ाना चाहिए। उपमहाविद् ने कहा, “यह सच है कि कोई भी प्रौद्योगिकी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती लेकिन यह भी उतना ही सच है कि प्रौद्योगिकी निश्चित रूप से शिक्षक की भूमिका को बदल देगी। भविष्य का शिक्षक केवल सूचना देने वाला नहीं होगा। वह एक मार्गदर्शक, एक गुरु, एक प्रश्नकर्ता और एक प्रेरक व्यक्तित्व होगा जो छात्रों में जिज्ञासा जगाएगा और उनके चरित्र का निर्माण करेगा।” छात्रों और शिक्षकों के लिए उन्होंने छह मार्गदर्शक संदेश साझा किए: आजीवन सीखने को अपनाएं, रचनात्मकता और सहानुभूति जैसी विशिष्ट मानवीय क्षमताओं को विकसित करें, विभिन्न विषयों के बीच सेतु बनाएं, राष्ट्रीय विकास में योगदान दें, शिक्षा और खेल में संतुलन बनाए रखें और परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहें। उन्होंने छात्रों से विज्ञान और संस्कार दोनों के साक्षात स्वरूप बनने का आग्रह किया। उपराज्यपाल सिन्हा ने युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी आकांक्षाओं को समाज और राष्ट्र की सेवा से जोड़ा। उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि वे पहली पीढ़ी हैं जो एआई को अपने साथी के रूप में पाकर बड़ी हो रही है, और मानवता के समृद्ध भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। उन्‍होंने कहा, “ईमानदार हाथों में शक्तिशाली उपकरण महान कार्य कर सकते हैं, लेकिन गलत हाथों में वही उपकरण गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। एआई के युग में, आधुनिक उपकरण और मशीनें पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली हो गई हैं, इसलिए उन्हें चलाने वाले हाथों में अधिक दृढ़ता, मूल्य, संस्कार और ज्ञान होना चाहिए।”

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Video Post

Quick Link