टीआईएफएफ में ‘फूलन’ को मिला स्टैंडिंग ओवेशन, रिची मेहता बोले- फूलन देवी थीं गलत, समझी गई लीजेंड

मुंबई। फिल्ममेकर रिची मेहता की फिल्म ‘फूलन’ को 51वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में स्टैंडिंग ओवेशन मिला। फिल्ममेकर का मानना है कि जिन पर यह फिल्म बनी है, वह एक ऐसी लीजेंड थीं, जिन्हें लोगों ने गलत समझा था। यह जरूरी था कि मिथकों को हटाकर उनके अंदर के इंसान को दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि फूलन देवी की कहानी को ईमानदारी और बिना समझौते से दिखाना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वह फूलन देवी के जीवन के एक खास दौर की तरफ खींचे चले आए थे। भारत की प्रसिद्ध महिला डकैत फूलन देवी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘फूलन’ का विश्व प्रीमियर सितंबर 2026 में 51वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में किया गया है। टीआईएफएफ में फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के बारे में बात करते हुए, राइटर-डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रिची मेहता ने कहा, “फूलन देवी की कहानी ऐसी है, जिसे ईमानदारी और बिना किसी समझौते के दिखाना जरूरी है। मैं फूलन देवी के जीवन के एक खास दौर की ओर खींचा चला आया, वह शुरुआती साल जब दुनिया उन्हें नहीं जानती थी और एक ऐसा भी दौर आया जब वह लीजेंड बन गई थीं। मेरे लिए यह जरूरी था कि सारी कहानियों को हटाकर उनके अंदर के इंसान को दिखाया जाए। उनकी कहानी में जो मुख्य विषय है, मुश्किलों के सामने डटे रहना, सम्मान की तलाश और अपनी आवाज उठाने की हिम्मत, ये हमेशा के लिए हैं।” उन्होंने कहा, “हर जगह पर ये आज भी उतनी ही मजबूती से लोगों के दिल को छूते हैं जितना तब छूते थे। इसीलिए मुझे लगा कि यही सही समय है, जब उनकी कहानी को पर्दे पर लाना चाहिए। ‘पोचर’ से लेकर ‘फूलन’ तक, अमेजन एमजीएम स्टूडियोज ने एक सच्चे क्रिएटिव पार्टनर की तरह साथ दिया है, जो फिल्ममेकर के विजन का साथ देता है और ऐसी कहानियों को बड़ा मंच प्रदान करता है। टीआईएफएफ में दर्शकों को खड़े होकर तालियां बजाते हुए और भावुक होते हुए देखकर लगता है कि फूलन की कहानी ने ठीक वैसे ही लोगों के दिल को छुआ है, जैसे हम चाहते थे। मुझे उम्मीद है कि मैंने उनकी आवाज और उनकी कहानी के साथ इंसाफ किया गया है, जैसे वह चाहती थीं कि दुनिया उन्हें जाने।” फिल्म में युवा फूलन देवी का मुख्य किरदार स्नेहा कुमारी ने निभाया है। यह फिल्म फूलन देवी की आत्मकथा ‘आई, फूलन – द ऑटोबायोग्राफी ऑफ इंडियाज बैंडिट क्वीन’ से प्रेरित है। फिल्म उनकी पूरी जीवनी दिखाने के बजाय केवल 48 घंटे के उस कड़े संघर्ष पर केंद्रित है, जब 2,000 सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने 17 साल की फूलन को एक गांव में घेर लिया था। इसका निर्माण अमेजन एमजीएम स्टूडियोज और नमाह पिक्चर्स द्वारा किया गया है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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