डूसू चुनाव 2026 : हिंसा और लिंगदोह कमेटी के नियमों के उल्लंघन पर हाई कोर्ट सख्त

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में हुई अहम सुनवाई में कोर्ट ने चुनाव के दौरान हिंसा और लिंगदोह कमेटी के नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया। इस मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के स्टूडेंट विंग एएसएपी की ओर से पेश हुए वकील आशु बिधूड़ी ने कोर्ट में संगठन का पक्ष रखा। वकील आशु बिधूड़ी ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि मामला लॉ फैकल्टी में दो दिन पहले हुई हिंसा और चुनाव प्रचार के दौरान लिंगदोह कमेटी की गाइडलाइंस के उल्लंघन से जुड़ा है। इसमें शामिल लोगों में छात्र और बाहरी लोग दोनों थे। उन पर दो दिन पहले लॉ फैकल्टी में हुई हिंसा में शामिल होने और लिंगदोह कमेटी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप था, खासकर गाड़ियों, पैम्फलेट और पोस्टरों का इस्तेमाल करके, जो हाई कोर्ट और लिंगदोह कमेटी के निर्देशों के तहत मना हैं। बिधूड़ी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने इन उल्लंघनों के आधार पर चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उन्होंने बताया, “याचिकाकर्ताओं ने चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी। इसके बाद, कोर्ट ने एएसएपी समेत सभी राजनीतिक पार्टियों को सफाई देने के लिए बुलाया और जवाब देने के लिए लगभग एक महीने का समय दिया। कोर्ट का मौजूदा रुख यह है कि उल्लंघन करने वाली किसी भी राजनीतिक पार्टी या छात्र को नुकसान के लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” वकील बिधूड़ी ने स्पष्ट किया कि एएसएपी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संगठन नियमों का पालन कर रहा है। वहीं, लॉ फैकल्टी में हुई हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है। लॉ फैकल्टी में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली है और गिरफ्तारियां भी की गई हैं। हाई कोर्ट की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए बिधूड़ी ने कहा कि कोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई छात्र या छात्र संगठन लिंगदोह गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट की चिंता यह थी कि क्या लोकतंत्र के नाम पर एक आपराधिक समाज बनाया जा रहा है, क्या बाहरी लोग आकर पूरे चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि अगर कोई छात्र या राजनीतिक संगठन इसका उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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