पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ज्यादती जारी, संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 40 बेगुनाह सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए हैं और बड़ी तादाद में लोग घायल भी हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए मानवाधिकारों के दस्तावेजीकरण और निगरानी से जुड़े एक संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) से हस्तक्षेप की मांग की है। पीओके स्थित ‘जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी’ (जेकेएचआरओ) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क से त्वरित हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि ये मौतें उस समय हुईं, जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से आयोजित शांतिपूर्ण लॉन्ग मार्च 27 जुलाई को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर दोबारा शुरू हुआ था। जेएएसी के हवाले से संगठन ने कहा, “मार्च में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए थे और इसमें 1 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी का अनुमान है।” जेकेएचआरओ ने कहा, “बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौजूदगी, सुरक्षा बलों की तैनाती, कथित अंधाधुंध गोलीबारी, संचार प्रतिबंध, मीडिया की सीमित पहुंच और आपात समन्वय में बाधाएं ये सभी हालात आगे और अधिक जनहानि का तत्काल खतरा पैदा कर रहे हैं। यह स्थिति अब केवल चिंता जताने वाले बयानों से नहीं संभाली जा सकती।” संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए पाकिस्तानी बलों से गोलीबारी रोकने की सार्वजनिक अपील करने, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलियों के इस्तेमाल पर रोक की गारंटी लेने और पीओके में आपात चिकित्सा एवं मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की। जेकेएचआरओ ने संबंधित विशेष प्रतिवेदकों की तत्काल तैनाती या ओएचसीएचआर की जांच टीम भेजने की भी मांग की। साथ ही, उसने क्षेत्र में आगे होने वाली जान-माल की हानि रोकने के लिए विश्वसनीय बातचीत की प्रक्रिया शुरू कराने का आग्रह किया। पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर संगठन ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पहले से चेतावनी दी जा चुकी है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं। सुरक्षा बल तैनात हैं। संचार सेवाएं प्रतिबंधित हैं। घातक बल का इस्तेमाल पहले ही किया जा चुका है। शुरुआती रिपोर्टों में 80 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही गई है, जबकि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने इससे अधिक संख्या बताई है। अभी तक घायलों की अंतिम और विश्वसनीय संख्या उपलब्ध नहीं है।” संगठन ने कहा, “अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि तनाव बढ़ने का खतरा है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था अगली मौत को रोकने के लिए तेजी से पर्याप्त कदम उठा पाएगी।” इससे पहले 17 जुलाई को भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने पीओके में बढ़ते तनाव के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों पर कथित पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने बयान जारी कर कहा था कि नागरिक समाज संगठन को अपराधी घोषित करना और सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए जेएएसी नेताओं और उनके परिवार को कानूनी सहायता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उनके निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया के अधिकारों की पूरी गारंटी होनी चाहिए।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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