प्रणव कंस्ट्रक्शन आईपीओ: नकारात्मक कैश फ्लो, अटके हुए प्रोजेक्ट्स और प्रमोटर के निजी झगड़े निवेशकों के लिए बड़े जोखिम

नई दिल्ली। रियल एस्टेट कंपनी प्रणव कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड का आईपीओ 7 सितंबर को निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। आईपीओ में निवेश पहले रिस्क फैक्टर्स को जानना जरूरी है, जिसमें नकारात्मक कैश फ्लो, अटके हुए प्रोजेक्ट्स और प्रमोटर के निजी झगड़े शामिल हैं। कंपनी ने सेबी के पास जमा कराए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में बताया है कि उसके दो रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स – निर्मल भवन सीएचएसएल और रजनीगंधा सीएचएसएल – में कानूनी विवादों, रेगुलेटरी अड़चनों और प्रक्रियात्मक कमियों के कारण भारी और लगातार देरी हुई है, और इनके समय पर समाधान की कोई निश्चितता नहीं है। कंपनी को निर्मल भवन सीएचएसएल का प्रोजेक्ट 2016 में और रजनीगंधा सीएचएसएल का प्रोजेक्ट 2018 में मिला था। कंपनी ने आरएचपी में बताया कि रुकी हुई मंजूरियों की वजह से पहले ही काफी देरी हो चुकी है और आगे की देरी से प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही या रेगुलेटरी मंजूरियों की समय-सीमा पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है, जिससे इन देरी का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। इस कारण हम यह गारंटी नहीं दे सकते कि हमारे द्वारा शुरू किए गए या भविष्य में शुरू किए जाने वाले अन्य प्रोजेक्ट्स में और भी ज्यादा देरी, कानूनी उलझनें या रेगुलेटरी बाधाएं नहीं आएंगी, और प्रोजेक्ट पूरा होने में ऐसी देरी और अनिश्चितताओं का हम पर ऑपरेशनल और आर्थिक रूप से बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा कंपनी का कैश फ्लो भी नकारात्मक बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 में यह -41.19 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 25 में -92.60 करोड़ रुपए था, जबकि वित्त वर्ष 24 में यह 5.46 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, कंपनी ने आरएचपी में प्रमोटर के निजी झगड़ों का भी जिक्र किया है। कंपनी ने बताया है कि उसके मुख्य प्रमोटर प्रणव किरण आशर के खिलाफ उनकी पत्नी वैशाली प्रणव अशर ने 5 जून, 2024 को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट, बोरीवली, मुंबई में ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005’ की धारा 12 के तहत केस दर्ज कराया था। आवेदक ने आवेदन के जरिए ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005’ के प्रावधानों के तहत सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, कस्टडी आदेश, मुआवजे और आर्थिक राहत के तौर पर 10.21 करोड़ रुपए की मांग की है। हालांकि मामला अभी लंबित है। कंपनी ने बताया कि हमारे प्रमोटर्स के खराब निजी संबंधों के कारण, हम ‘संबंधित व्यक्ति’ (वैशाली प्रणव अशर) और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा पा रहे हैं। सेबी आईसीडीआर नियमों के तहत ‘रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस’ में प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी यह जानकारी देनी जरूरी है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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