बलूचिस्तान में जबरन गायब करने और हत्याओं के खिलाफ जर्मनी में प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

बर्लिन। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने जर्मनी के हनोवर शहर में एक विरोध रैली आयोजित कर बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई। संगठन ने जबरन गायब किए जाने, बिना अदालती प्रक्रिया की हत्याओं और सैन्य अभियानों जैसे मुद्दों पर चिंता जताई। सोमवार को यह रैली हनोवर के केंद्रीय क्रोपके क्षेत्र से शुरू हुई और शहर की सड़कों से होते हुए लोअर सैक्सनी राज्य संसद तक पहुंची। बीएनएम के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद के बाहर नारे लगाए और लोगों को बलूचिस्तान की स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए पर्चे बांटे। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि इन मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और बलूच जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सभा को बीएनएम के कार्यकर्ता आसिफ बलूच और आकिब बलूच ने संबोधित किया। उनके साथ पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) के प्रतिनिधि सईद मोमंद और फजल मीना खेल भी मौजूद रहे। बीएनएम ने कहा कि वक्ताओं ने जबरन गायब किए जाने, मनमानी गिरफ्तारियां, यातना और आम नागरिकों की मौतों जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने बलोच और पश्तून समुदायों के बीच एकता और व्यावहारिक सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। संगठन के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ की रिपोर्टों का हवाला देते हुए वक्ताओं ने अगस्त 2026 में बलूचिस्तान के पंजगुर जिले में कई नागरिकों की कथित गैर-न्यायिक हत्याओं पर चिंता व्यक्त की। इनमें पीर जान, शोएब बलूच, हाफिज मुदस्सिर, वजीर अहमद और जासिम के नाम शामिल बताए गए। वक्ताओं ने सैन्य हवाई हमलों और ड्रोन हमलों में हुई नागरिक मौतों सहित सभी घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी इन घटनाओं पर ध्यान देने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की। बीएनएम ने दोहराया कि उसके अनुसार बलूच लोगों को स्वतंत्रता और अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला करने का अधिकार है। संगठन का कहना है कि बलूचिस्तान के मुद्दे का समाधान बल प्रयोग के बजाय मानवाधिकारों, न्याय और आत्मनिर्णय के अधिकार के सम्मान के आधार पर होना चाहिए। इस महीने की शुरुआत में बीएनएम ने अमेरिका के सिएटल शहर में भी एक विरोध प्रदर्शन किया था। वहां संगठन ने बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, सैन्य अभियानों और बमबारी के मुद्दों को लोगों के सामने उठाया। बीएनएम के अनुसार, वक्ताओं ने अमेरिकी जनता से बलूचिस्तान में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उनका कहना था कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे से पाकिस्तान को मिलने वाली मदद ‘अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तानी सेना का समर्थन करने’ में इस्तेमाल हो रही है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान में जारी हिंसा, सैन्य अभियानों और संघर्षों के कारण आम नागरिकों की जान जा रही है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों और दी जाने वाली सहायता की समीक्षा करने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता को मानवाधिकारों के सम्मान से जोड़ा जाना चाहिए।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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