भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 78,000 के नीचे

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक या 0.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,728.16 और निफ्टी 78.35 अंक या 0.32 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,287.65 पर था। बाजार में बिकवाली आईटी और एफएमसीजी शेयरों में देखी गई। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी टॉप लूजर थे। निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस हरे निशान में बंद हुए। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, एचयूएल, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी लाल निशान में बंद हुए। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक या 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक या 0.36 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,809.25 पर था। बाजार के जानकारों ने कहा कि ऊर्जा की वजह से इनपुट लागत का दबाव अभी भी निकट भविष्य में बाजार की धारणा पर असर डाल रहा है। हालांकि, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजों से आने वाली तिमाहियों में कमाई के अनुमानों में सुधार की उम्मीद है। इस तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से मुनाफे में मदद मिली, लेकिन यह कब तक जारी रहेगा, इस पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ज्यादा लागत पर नया स्टॉक खरीदने से वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में मार्जिन बढ़ने की गुंजाइश कम हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में निवेशक उन सेक्टर और कंपनियों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं जिनकी कमाई का भविष्य साफ है, खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में। घरेलू स्तर पर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और आरबीआई के एफसीएनआर (बी)डिपॉजिट विंडो को समय से पहले बंद करने के फैसले के बाद बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और कंज्यूमर डेटा के नरम रहने से निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की चिंताएं कम हुई हैं, जिससे लंबी अवधि के लिए जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ है।”

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Video Post

Quick Link