भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता : सीतारमण

मुंबई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट के बीच 3एफ-ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा पर अधिक ध्यान देने का आह्वान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि घरेलू अर्थव्यवस्था अब भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से आग्रह किया कि वे सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को भुगतान करने में 45 दिन की समय-सीमा से अधिक विलंब न करें।
केंद्रीय वित्त मंत्री महाराष्ट्र के मुंबई में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की 37वीं स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। सीतारमण ने कहा कि भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता, हमें लोगों में विश्वास जगाने की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे डर फैलाने से बचें, इसके बजाय लोगों में विश्वास जगाने पर ध्यान केंद्रित करें। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक चुनौतियां मुख्य रूप से बाहरी प्रकृति की हैं, खासकर सोना, ईंधन और उर्वरक जैसे आयात के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरतों के कारण। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं, जो निराशावादी माहौल बनाना चाहते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत लगातार सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है, जबकि कई हाई-फ़्रीक्वेंसी संकेतक लगातार औद्योगिक मांग और आर्थिक गति की ओर इशारा करते हैं।
सीतारमण ने कहा कि भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया को घरेलू विकास को बनाए रखने के लिए संतुलित किया गया है, वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से राजस्व पर 1 लाख करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के अलावा, उर्वरकों की कीमतें भी “अकल्पनीय” स्तर पर पहुंच गई हैं,जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी मोर्चे पर “कुछ चुनौतियां” पैदा कर रही हैं। वित्त मंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एमएसएमई के रुके हुए भुगतानों में फंसे 8.1 लाख करोड़ रुपये का मुद्दा उनकी कार्यशील पूंजी और विकास पर असर डाल रहा है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आग्रह किया कि वे एमएसएमई को भुगतान करने के लिए 45 दिन की समय-सीमा का उल्लंघन न करें।

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