भारत-स्वीडन संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा रही रणनीतिक साझेदारी : स्वीडिश राजदूत

नई दिल्ली। मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप की पांच दिवसीय यात्रा के तहत स्वीडन पहुंचे थे। पीएम मोदी और प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने द्विपक्षीय बातचीत के बाद भारत और स्वीडन के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर ले जाने का ऐतिहासिक फैसला किया। भारत में स्वीडन की राजदूत पेट्रा मेनेंडर भी मानते हैं कि इसने संबंधों को और विस्तार दिया है। आईएएनएस से बातचीत में पेट्रा ने माना कि साझेदारी से रक्षा, सुरक्षा, नवाचार से लेकर ट्रेड समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है। पेट्रा मेनेंडर ने कहा, “भारत और स्वीडन के बीच संबंध लगातार व्यापक और मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी समझौते से रक्षा, सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को मिले नए आयाम पर उन्होंने कहा, “इस यात्रा से स्वीडन और भारत के रिश्तों को नया आयाम मिला। प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन के प्रधानमंत्री, क्राउन प्रिंसेस और वरिष्ठ कारोबारी नेताओं के साथ हुई बैठकों ने दोनों देशों के संबंधों को और ऊंचाई तक पहुंचाया। इसी दौरान भारत और स्वीडन ने रणनीतिक साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।” यूं तो भारत-स्वीडन के संबंध काफी पुराने हैं, लेकिन फिलहाल जो कुछ भी हो रहा है, उसने एक नया पन दिया है। मेनेंडर ने कहा, “स्वीडिश कंपनियां भारत में 100 साल से अधिक समय से काम कर रही हैं। अब दोनों देश 2030 तक आर्थिक आदान-प्रदान को दोगुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और हरित बदलाव इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), कनेक्टिविटी, दूरसंचार, खनन और लाइफ साइंसेज जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के पास मजबूत क्षमताएं हैं और इनमें सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा, सुरक्षा और खुफिया सहयोग को मजबूत करने के सवाल पर स्वीडिश राजदूत ने कहा कि इसके लिए कार्ययोजना काफी स्पष्ट है। इसमें साइबर सुरक्षा संवाद को आगे बढ़ाना, रक्षा क्षेत्र में नवाचार को मजबूत करना और मौजूदा राजनीतिक संवाद को और ऊंचे स्तर पर ले जाना शामिल है। मेनेंडर ने कहा, ” रणनीतिक साझेदारी समझौता व्यापक है और इसमें राजनीतिक संवाद से लेकर शोध एवं नवाचार तक कई क्षेत्र शामिल हैं। व्यापार और कारोबारी सहयोग के लिए भी दोनों देशों के बीच काफी संभावनाएं हैं। भारत और स्वीडन ने साझेदारी के लिए मजबूत आधार तैयार कर लिया है और अब जरूरत इस बात की है कि समझौते के तहत तय लक्ष्यों को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाया जाए।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे करने और भारत-स्वीडन संबंधों में उनके योगदान पर मेनेंडर ने कहा कि यह एक लंबी अवधि है और इस दौरान दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे संबंध और गहरे हुए हैं। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में भारत-स्वीडन संबंधों को एक अलग स्तर पर ले जाया गया है। रणनीतिक साझेदारी समझौते के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान भी बढ़ रहा है। लोगों के बीच मजबूत होते हुए संबंध, दोनों देशों की भविष्य की साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहे हैं।” भारत के प्रति अपने लगाव का जिक्र करते हुए मेनेंडर ने बोलीं, “मुझे यहां के लोग और संस्कृति बेहद पसंद हैं। भारतीय खान-पान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय भोजन की विविधता पसंद है।” उन्होंने डोसा, बिरयानी, इडली और अलग-अलग तरह की चटनियों का भी जिक्र किया।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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