नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर 2:43 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन भौम प्रदोष व्रत है; भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। शाम 6:35 मिनट से रात 8:52 मिनट तक पूजा करना फलदाई रहेगा। जब प्रदोष मंगलवार को पड़ता है तो उसे भौम प्रदोष कहते हैं। मंगलवार सुबह 6:15 बजे सूर्योदय और शाम 6:34 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 3:02 बजे चंद्रोदय और दोपहर 4:46 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जबकि चंद्रमा शाम 04:39 बजे तक पुष्य नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र आरंभ होगा। मंगलवार को शाम 4:39 से अगले दिन सुबह 6:03 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, वहीं अगली सुबह 00:39 बजे तक परिघ योग रहेगा, इसके बाद शिव योग शुरू हो जाएगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 10:40 से दोपहर 12:09 बजे तक रहेगा। वहीं, राहुकाल दोपहर 3:29 बजे से 5:01 बजे और गुलिक काल दोपहर 12:24 से 1:56 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 9:19 से दोपहर 10:52 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है। मंगलवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेगा। उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।











