मथुरा: बरसाना में राधा अष्टमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, ब्रह्म मुहूर्त में हुआ राधा रानी का महा अभिषेक

मथुरा। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी मथुरा के बरसाना में शनिवार को राधा अष्टमी के पावन पर्व पर श्री राधा रानी मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। देशभर से पहुंचे भक्तों ने राधा रानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और जन्मोत्सव की खुशियों में शामिल हुए। इस दौरान, मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र राधा रानी के जयकारों से गूंजता रहा। राधा अष्टमी के अवसर पर सुबह करीब 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में श्री राधा रानी का महा अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक में विभिन्न जड़ी-बूटियों, चांदी के कलश और अन्य पूजन सामग्री का प्रयोग किया गया। विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच हुए इस विशेष अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने राधा रानी की भक्ति में लीन होकर दर्शन किए। राधा रानी के जन्मोत्सव को लेकर बरसाना में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे बरसाना में भक्तिमय माहौल बना रहा। राधा अष्टमी को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से राधा-कृष्ण की आराधना करने से जीवन में प्रेम, सुख और शांति आती है। यह त्योहार आमतौर पर मथुरा, वृंदावन और आसपास के ब्रज क्षेत्रों में मनाया जाता है। राधा को भगवान कृष्ण की ‘ह्लादिनी शक्ति,’ यानी आनंद देने वाली शक्ति, माना जाता है। उनके बिना, कृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि जो भक्त राधा अष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा और व्रत करते हैं, उन्हें राधा रानी और भगवान कृष्ण दोनों का आशीर्वाद मिलता है। इससे जीवन में सुख-शांति आती है और पापों का नाश होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी का जन्म बरसाना (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनके पिता वृषभानु और माता कीर्तिदा थीं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, राधा ने बचपन में अपनी आंखें तब तक नहीं खोलीं, जब तक कि उन्होंने पहली बार भगवान कृष्ण को नहीं देखा। जब कृष्ण उनके सामने आए, तब उन्होंने पहली बार अपनी आंखें खोली और उन्हें देखकर मुस्कुराईं। यह घटना उनके और कृष्ण के बीच के गहरे और आध्यात्मिक संबंध को दर्शाती है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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