राजिंदर गोयल: रणजी ट्रॉफी इतिहास के सफलतम गेंदबाज को भारतीय टीम में कभी मौका नहीं मिला

नई दिल्ली। रणजी ट्रॉफी, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा संचालित देश का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है। रणजी में अच्छा प्रदर्शन भारतीय टीम में जगह बनाने की गारंटी के रूप में देखा जाता है। हालांकि, रणजी ट्रॉफी के इतिहास में गेंद और बल्ले से यादगार प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ी टीम इंडिया में कभी जगह नहीं बना पाए। ऐसे खिलाड़ियों में सबसे बड़ा नाम राजिंदर गोयल का है। राजिंदर गोयल का जन्म 20 सितंबर, 1942 को नरवाना, हरियाणा में हुआ था। बचपन से ही राजिंदर को क्रिकेट में रुचि थी। वह बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज थे। स्थानीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद गोयल को 1958-59 में हरियाणा की तरफ से प्रथम श्रेणी में डेब्यू का मौका मिला था। गोयल की घूमती गेंदें अक्सर बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली साबित होती थीं। राजिंदर बल्लेबाजी के लिए अनुकूल मानी जाने वाली पिच पर भी टर्न कराने में माहिर थे। गोयल का प्रथम श्रेणी करियर लगभग 26 साल चला। उन्होंने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच 1985 में खेला था। 26 साल लंबे करियर में राजिंदर गोयल ने रणजी ट्रॉफी में बड़ी सफलता पाई। उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में 637 विकेट लिए। उनके आखिरी मैच के 41 साल बाद भी रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक विकेटों का यह रिकॉर्ड है। बाएं हाथ के इस गेंदबाज ने कुल 157 प्रथम श्रेणी मैचों में 750 विकेट हासिल किए थे। इस दौरान एक मैच में 10 या उससे अधिक विकेट लेने की उपलब्धि उन्होंने 18 बार हासिल की थी। एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट उन्होंने 59 बार लिए थे। इतने प्रभावशाली करियर के बावजूद राजिंदर गोयल देश के उन दुर्भाग्यशाली क्रिकेटरों में से एक हैं जिन्हें कभी भी भारतीय राष्ट्रीय टीम की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला। 21 जून, 2020 को 77 वर्ष की आयु में उनका निधन रोहतक में हुआ।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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