वैश्विक अस्थिरता बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 72,000 के नीचे

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 71,924.68 और निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,363.35 पर था। बाजार में बिकवाली का सबसे अधिक दबाव एफएमसीजी और सरकारी बैंकिंग स्टॉक्स में देखा गया। सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी 1.67 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांकों में शामिल थे। दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी हरे निशान में थे। लार्जकैप के उलट मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई। निफ्टी स्मॉलैकप 100 इंडेक्स 272.10 अंक या 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,425.80 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 47.25 अंक की मामूली तेजी के साथ 58,834.55 पर बंद हुआ। सेंसेक्स पैक में बीईएल, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और टाइटन गेनर्स थे। आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचयूएल, एलएंडटी, एसबीआई, टीसीएस, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, टाटा स्टील, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, इटरनल और पावर ग्रिड लूजर्स थे। जानकारों ने कहा कि 10-साल के बॉन्ड यील्ड के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और बाहरी अनिश्चितताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से सेंटीमेंट कमजोर होने के कारण भारतीय बाजार सत्र की शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख पाए। आरबीआई द्वारा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डॉलर की जरूरतों के लिए एक स्पेशल विंडो खोलने और हेजिंग नियमों को सख्त करने के बाद रुपए में रिकवरी आई, जिससे करेंसी पर दबाव कम करने में मदद मिली। उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई द्वारा अतिरिक्त लिक्विडिटी को सोखने के लिए दैनिक सीआरआर मेंटेनेंस की जरूरत को बढ़ाने के बाद बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई, जबकि निवेशक आगे और मॉनेटरी टाइटनिंग की गुंजाइश के संकेतों के लिए घरेलू सीपीआई महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में तनाव एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि सऊदी और क्षेत्रीय एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती हमलों के जारी रहने से संभावित आपूर्ति में रुकावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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