वैश्विक कर नियमों को निर्धारित करने में ब्रिक्स देशों की भूमिका और मजबूत होनी चाहिए: वित्त मंत्री सीतारमण

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय कर नियमों के पुनर्गठन की चल रही प्रक्रिया में ब्रिक्स (बीआरआईसीएस) देशों के कर प्रशासनों को अपनी सामूहिक आवाज और मजबूत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के अनुभव और दृष्टिकोण को वैश्विक कर व्यवस्था में उचित स्थान मिलना आवश्यक है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स टैक्स हेड्स बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत कर प्रशासनिक ढांचा विकसित किया है। इसलिए वैश्विक कर नियमों को अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ बनाने के लिए इन देशों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। सीतारमण ने बताया कि भारत ने ब्रिक्स सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए दो नए कार्य समूहों का प्रस्ताव रखा है। इनमें पहला समूह अंतरराष्ट्रीय कराधान और ट्रांसफर प्राइसिंग पर केंद्रित होगा, जबकि दूसरा समूह राजस्व सांख्यिकी (रेवेन्यू स्टेटिस्टिक्स) से जुड़े मुद्दों पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि इन कार्य समूहों का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के कर प्रशासन के समक्ष आने वाली साझा चुनौतियों के समाधान के लिए एक स्थायी मंच तैयार करना है, जो भारत की 2026 की अध्यक्षता के बाद भी काम करता रहे। वित्त मंत्री ने कहा कि ट्रांसफर प्राइसिंग विवादों का बोझ विकासशील देशों पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ता है। वहीं कई बार ऐसे राजस्व मूल्यांकन ढांचे अपनाए जाते हैं, जो विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक परिस्थितियों को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं करते। उन्होंने कहा कि इन दोनों कार्य समूहों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे भारत की अध्यक्षता समाप्त होने के बाद भी जारी रहें। वर्ष 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन संभालेगा। सीतारमण ने कर प्रशासन में हो रहे डिजिटल बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कर प्रणालियां अब कागजी और पारंपरिक प्रक्रियाओं से निकलकर डेटा-आधारित और डिजिटल व्यवस्थाओं की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत के फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस ऑथेंटिकेशन और एआई-आधारित करदाता सहायता प्रणालियों में ब्रिक्स देशों ने विशेष रुचि दिखाई है। बैठक में ब्रिक्स यंग टैक्स प्रोफेशनल्स प्रोग्राम को हर वर्ष आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। नागपुर स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (एनएडीटी) में अप्रैल में आयोजित पहले प्रत्यक्ष कार्यक्रम में ब्रिक्स के सात देशों के युवा कर अधिकारियों ने भाग लिया था और अंतरराष्ट्रीय कराधान से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया था। भारत ने ब्रिक्स सहयोग के तहत टैक्स कोलैबोरेशन टूल, टैक्स नॉलेज हब और क्रॉस-लर्निंग लैब जैसी पहलें भी विकसित की हैं। इसके अलावा वीएटी मॉडर्नाइजेशन रिपोर्ट और एचआर डेवलपमेंट इंडेक्स पर भी काम जारी है। वित्त मंत्री ने कहा कि अंतिम रूप दिए जा रहे ब्रिक्स टैक्स सपोर्ट नेटवर्क का उद्देश्य सदस्य देशों के कर प्रशासन को सहयोग देने और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यावहारिक मंच तैयार करना है। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान और ट्रांसफर प्राइसिंग पर प्रस्तावित कार्य समूह सदस्य देशों को कर संधियों की व्याख्या, ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट, एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट्स, म्यूचुअल एग्रीमेंट प्रक्रियाओं और बहुपक्षीय वार्ताओं के अनुभव साझा करने का स्थायी मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि राजस्व सांख्यिकी कार्य समूह ऐसा मूल्यांकन ढांचा विकसित कर रहा है, जो ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कर प्रणाली के प्रदर्शन को माप सके, बजाय उन मॉडलों पर निर्भर रहने के जो पूरी तरह अलग आर्थिक परिस्थितियों वाले देशों के लिए विकसित किए गए हैं।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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