हृदयनाथ मंगेशकर : भगवद्गीता के हर श्लोक को अलग राग में ढाला, ऐसा रहा संगीत के जादूगर का सफर

मुंबई। भारतीय संगीत की दुनिया में हृदयनाथ मंगेशकर ऐसे संगीतकार हैं, जिन्होंने भक्ति संगीत, मराठी भावगीत और हिंदी फिल्मों के लिए कई यादगार धुनें तैयार कीं। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने संगीत को अलग-अलग रूपों में पेश करने की कोशिश की। उनके संगीत सफर का एक अनोखा काम श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़ा है। उन्होंने भगवद्गीता के श्लोकों को इस तरह संगीत में पिरोया कि हर दोहेनुमा श्लोक के लिए अलग राग का इस्तेमाल किया गया। इस प्रयोग ने उन्हें दूसरे संगीतकारों से अलग पहचान दी। हृदयनाथ मंगेशकर का जन्म 26 अक्टूबर 1937 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह मशहूर संगीतकार और रंगमंच कलाकार दीनानाथ मंगेशकर के बेटे हैं। उनकी बड़ी बहनों में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी महान गायिकाएं शामिल हैं। ऐसे परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही उनके आसपास संगीत का माहौल था, हालांकि अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखीं और अलग शैली तैयार की। हृदयनाथ ने महान शास्त्रीय गायक उस्ताद अमीर खान से संगीत की ट्रेनिंग ली। उन्होंने शुरुआती दौर में फिल्मों और स्टेज शो में गाने भी गाए, लेकिन आगे चलकर संगीतकार के रूप में ज्यादा पहचान बनाई। उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों के अलावा भजन, अभंग और भावगीत जैसी संगीत विधाओं में भी काम किया। यही वजह है कि उनका संगीत सफर केवल फिल्मी गानों तक सीमित नहीं रहा। उनके करियर का एक खास हिस्सा संतों और कवियों की रचनाओं को संगीत देना रहा है। उन्होंने संत सूरदास के भजन ‘निसदिन बरसत नैन हमारे’ और मीराबाई के भजन ‘बरसे बूंदिया सावन की’ को अपनी धुनों में रिकॉर्ड किया। मीराबाई के भजनों पर आधारित उनके एल्बम ‘चला वही देश’ को भी खास पहचान मिली। इसी तरह संत ज्ञानेश्वर के अभंगों की रिकॉर्डिंग के जरिए उन्होंने मराठी भक्ति संगीत में अपना योगदान दिया। हृदयनाथ मंगेशकर के संगीत सफर की सबसे खास उपलब्धियों में श्रीमद्भगवद्गीता की रिकॉर्डिंग शामिल है। वह भगवद्गीता को रिकॉर्ड करने वाले पहले संगीतकार बने, जिन्होंने हर श्लोक को अलग राग में स्वरबद्ध किया। इस प्रयोग से उन्होंने दिखाया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रचनाओं को नए तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। फिल्मों में भी हृदयनाथ ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। उनकी खुद की बनाई और निर्मित फिल्म ‘लेकिन’ के संगीत को खास सराहना मिली। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। संगीत में योगदान के लिए हृदयनाथ मंगेशकर को 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य सम्मान भी मिले।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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