1 नवंबर से लागू होगा जीएसटी सुधारों का पहला चरण, छोटे निर्यातकों और उद्योगों को मिलेगी राहत

 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में किए गए सुधारों के पहले चरण को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा 26 अक्टूबर को जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट, रिफंड प्रक्रिया को तेज करने और निर्यातकों को राहत देने से जुड़े नए प्रावधान 1 नवंबर 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। इन बदलावों के तहत वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए डिस्काउंट प्रबंधन को आसान बनाया गया है। नए नियमों और क्रेडिट नोट प्रावधानों के लागू होने से कारोबारियों को कर अनुपालन में अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी। सरकार ने उन उद्योगों को भी बड़ी राहत दी है जो इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का सामना कर रहे हैं, यानी जहां कच्चे माल पर लगने वाला जीएसटी अंतिम उत्पाद पर लगने वाले जीएसटी से अधिक होता है। ऐसे व्यवसाय अब जोखिम मूल्यांकन की शर्तों के अधीन अपने पात्र रिफंड का 90 प्रतिशत तक अग्रिम (प्रोविजनल) रिफंड प्राप्त कर सकेंगे। इससे उनकी कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर दबाव कम होने की उम्मीद है। छोटे निर्यातकों के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने टैक्स भुगतान वाले निर्यात रिफंड के लिए पहले लागू 1,000 रुपए की न्यूनतम सीमा समाप्त कर दी है। इससे डाक और कूरियर के माध्यम से छोटे स्तर पर निर्यात करने वाले निर्यातकों को भी बिना किसी न्यूनतम सीमा के रिफंड का लाभ मिल सकेगा। एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव इंटरमीडियरी सेवाओं से संबंधित है। नए नियमों के तहत ऐसी सेवाओं के लिए “प्लेस ऑफ सप्लाई” अब सेवा प्रदाता या मध्यस्थ के स्थान के बजाय सेवा प्राप्त करने वाले व्यक्ति के स्थान को माना जाएगा। इससे भारतीय सेवा निर्यातकों को कर संबंधी स्पष्टता मिलेगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि व्यापक संरचनात्मक और कानूनी बदलावों का अगला चरण 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए केंद्रीय और राज्य जीएसटी कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी। ये फैसले 8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद बैठक में लिए गए थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य करदाताओं पर अनुपालन बोझ कम करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के प्रवाह को सुचारु बनाना और रिफंड प्रक्रिया को तेज करना था। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जीएसटी सुधारों का कार्यान्वयन आवश्यक तकनीकी और सिस्टम अपग्रेडेशन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। 1 नवंबर के बाद जहां भी तकनीकी रूप से संभव होगा, वहां रिफंड की स्वीकृति प्रक्रिया को स्वचालित (ऑटोमेटेड) किया जाएगा। हालांकि यह सुविधा केवल नए रिफंड आवेदनों पर लागू होगी और पहले से लंबित मामलों पर नहीं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी कानूनों में संशोधन से जुड़े बड़े बदलाव, जैसे गिरफ्तारी प्रावधानों में संशोधन, अभियोजन सीमा का युक्तिकरण, ई-वे बिल नियमों में बदलाव और कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपए की न्यूनतम सीमा तय करना, 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए प्रावधानों का प्रभाव पहले से हुई गिरफ्तारियों पर नहीं पड़ेगा। परिषद ने कुछ गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को कानून से हटाने का निर्णय लिया है, लेकिन यह बदलाव केवल निर्धारित तिथि से आगे के मामलों पर लागू होगा। सरकार फिलहाल अंतरिम दिशा-निर्देशों पर भी विचार कर रही है, हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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