पीओके क्रूरता के खिलाफ यूके में पाकिस्तानी कॉन्सुलेट के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन

लंदन। यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड शहर में पाकिस्तानी कॉन्सुलेट (महावाणिज्य दूतावास) के बाहर कश्मीरी समुदाय के कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की हिंसक कार्रवाई की निंदा की। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस प्रदर्शन का हिस्सा थे। प्रदर्शनकारियों ने सिविल सोसाइटी ग्रुप ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) के साथ एकजुटता दिखाई और इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे क्रूर ऑपरेशन पर विराम लगाने की मांग की। हाथों में ले रखी तख्तियों पर लिखा था, ‘पाकिस्तान क्रूरता बंद करो’, ‘पाकिस्तान रावलकोट में कश्मीरियों को मारना बंद करो’ और ‘हम अवामी एक्शन कमेटी के साथ खड़े हैं’। इस दौरान पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के खिलाफ नारे लगाए गए। पीओके में पिछले कुछ दिनों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। मरने वालों की असल संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। इसके और बढ़ने की आशंका है। ब्रैडफोर्ड में यह विरोध प्रदर्शन दुनिया भर में पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के बाहर प्रवासी कश्मीरी समुदाय के बढ़ते प्रदर्शनों के बीच हुआ है। प्रदर्शनकारी पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों की क्रूर कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग कर रहे हैं। पिछले हफ्ते, कई ब्रिटिश सांसदों ने पीओके बर्बरता के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की क्रूरता पर गहरी चिंता जताई थी। ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बर्न ने कहा था कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलीबारी की खबरें ‘बेहद चिंताजनक’ हैं। पीओके में कम्युनिकेशन ब्लैकआउट और मानवाधिकारों के उल्लंघन को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए बर्न ने कहा कि कश्मीर पर ‘ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप’ (यूके संसद का सभी पार्टियों का एक समूह) ने दो मांगें रखी हैं। ब्रिटिश सांसद ने कहा, “पहली मांग यह है कि लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन के साथ तुरंत बातचीत की जाए और कहा जाए कि यह सब बंद होना चाहिए। दूसरी मांग यह है कि हम अपने विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से भी मिलें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि वे पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे ऊंचे स्तर पर अपनी बात रख रहे हैं। असल में, जरूरत इस बात की है कि बरसों पहले यूएन के प्रस्तावों में किए गए लंबे समय के वादों का सम्मान किया जाए, लेकिन अभी के लिए हमें हिंसा को रोकने की जरूरत है।”

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Video Post

Quick Link