ललिथा ज्वेलरी के प्रमोटर्स को सेबी से मिला समन

नई दिल्ली। ललिथा ज्वेलरी मार्ट ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में बताया कि कंपनी, उसकी सब्सिडियरी, प्रमोटर, डायरेक्टर और मुख्य मैनेजमेंट अधिकारी अलग-अलग ट्रिब्यूनल, अर्ध-न्यायिक अधिकारियों और अपीलीय मंचों के सामने चल रही कुछ कानूनी और रेगुलेटरी कार्यवाही में शामिल हैं। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास जमा कराए गए डीआरएचपी के अनुसार, कंपनी ने अपने प्रमोटरों के खिलाफ एक आपराधिक मामले और दो टैक्स मामलों की जानकारी दी है। इन मामलों में शामिल कुल रकम लगभग 58.66 करोड़ रुपए है। डीआरएचपी में सेबी द्वारा फरवरी 2022 में कंपनी के प्रमोटरों एम. ​​किरण कुमार जैन और हेमा किरण कुमार जैन को जारी किए गए समन का भी ब्योरा दिया गया है। ये समन ‘कृष्णा फैब्रिक्स लिमिटेड’ के शेयरों (स्क्रिप) की जांच के सिलसिले में जारी किए गए थे। इस कंपनी में प्रमोटरों में से एक के पास बहुमत हिस्सेदारी है। सेबी ने अपने समन में आरोप लगाया था कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि कृष्णा फैब्रिक्स की सिक्योरिटीज में ऐसे ट्रांजैक्शन किए जा रहे थे जो निवेशकों और प्रतिभूति बाजार के लिए नुकसानदायक थे। समन में सेबी एक्ट, 1992 और सेबी (इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक) रेगुलेशंस, 2015 के कथित उल्लंघन का भी जिक्र किया गया था। रेगुलेटर ने प्रमोटरों से कई डॉक्यूमेंट और जानकारी मांगी थी, जिसमें ट्रेड की जानकारी, इनकम-टैक्स रिटर्न, कृष्णा फैब्रिक्स और स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी, बैंक अकाउंट की जानकारी और फंड के सोर्स शामिल थे। प्रमोटरों ने 16 फरवरी, 2022 की तारीख वाले लेटर के जरिए सेबी के समन का जवाब दिया। बाद में, 10 अगस्त, 2024 को एम. किरण कुमार जैन और हेमा किरण कुमार जैन ने फिर से सेबी को लिखा और बताया कि उन्होंने फरवरी 2022 में ही समन का जवाब दे दिया था और उन्हें रेगुलेटर से आगे कोई जानकारी नहीं मिली थी। दस्तावेज के अनुसार, डीआरएचपी की तारीख तक, इस मामले के संबंध में प्रमोटरों के खिलाफ सेबी की ओर से कोई कार्यवाही या एक्शन शुरू नहीं किया गया था। कंपनी ने चेतावनी दी कि बताई गई कानूनी कार्यवाहियों में प्रतिकूल घटनाक्रम के कारण अतिरिक्त देनदारियां और खर्च हो सकते हैं। उसने यह भी कहा कि ऐसी कार्यवाहियों से मैनेजमेंट का समय और संसाधन दूसरी तरफ लग सकते हैं और इससे कंपनी के मुनाफे, प्रतिष्ठा, वित्तीय स्थिति और कामकाज के नतीजों पर असर पड़ सकता है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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