नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा बाल विवाह के खिलाफ भारत का समर्थन करने के फैसले का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) 27 नवंबर को बाल, कम उम्र और जबरदस्ती शादी को खत्म करने के लिए बाल विवाह उन्मूलन अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। इस निर्णय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे समाज में बाल विवाह या जबरन शादी के लिए कोई जगह नहीं है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट किया, “अब तो यूएन भी उस बात से सहमत है, जो हम असम में अपने पिछले कार्यकाल से ही कहते आ रहे हैं। हमारे समाज में बाल विवाह या जबरन शादी की कोई जगह नहीं है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र में शादी और जबरन शादी को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है, जो इस बुराई को खत्म करने के वैश्विक समर्थन के तौर पर काम करेगा।” मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में असम की कोशिशों के शानदार नतीजे सामने आए हैं। 12,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, 11,000 से ज़्यादा गिरफ्तारियां हुईं और 20 जिलों में बाल विवाह में 81 फीसदी की कमी आई है। साथ ही कम उम्र में गर्भवती होने के मामलों में भारी कमी आई है और महिलाओं की उच्च शिक्षा में दाखिले की संख्या बढ़ी है।” सरमा ने कहा, “संयोग से हमने पहले ही घोषणा कर दी थी कि नवंबर के महीने में हम बाल विवाह और जबरन शादी के खिलाफ एक जोरदार अभियान चलाएंगे और सभी दोषियों को सजा दिलाएंगे, ताकि हमारी बेटियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। यूएन की इस घोषणा से पता चलता है कि असम की कोशिशें अकेले नहीं थीं। यह 3.5 करोड़ की आबादी वाले राज्य से एक ऐसे अपराध को खत्म करने की कोशिश थी जो एक वैश्विक समस्या है।” मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “बाल विवाह के खिलाफ असम की लड़ाई ने एक राष्ट्रीय चर्चा को जन्म दिया और अब इसे वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली है।











