समुद्री सुरक्षा, अदन की खाड़ी और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में नौसेना की सक्रिय निगरानी

 नई दिल्ली। भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में देश के समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए लगातार सक्रियता बनाए हुए है। अदन की खाड़ी और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के आसपास के समुद्री क्षेत्र में नौसेना विशेष सतर्कता बरत रही है। यहां नौसेना के युद्धपोत समुद्री डकैती के खतरे के बीच व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रहे हैं। इन समुद्री क्षेत्रों से दुनिया का महत्वपूर्ण व्यापारिक यातायात गुजरता है। बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज ऊर्जा, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामान लेकर इस मार्ग से आवाजाही करते हैं। ऐसे में समुद्री डकैती या किसी अन्य सुरक्षा खतरे की स्थिति में इन जहाजों और उनमें सवार चालक दल की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। भारतीय नौसेना की समुद्री डकैती रोधी तैनाती अदन की खाड़ी में जारी है। वर्ष 2008 से अब तक नौसेना ने अदन की खाड़ी और अफ्रीका के पूर्वी तट पर लगातार तैनाती के माध्यम से करीब 4 हजार व्यापारिक जहाजों और हजारों नाविकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है। बीते दिनों ही नौसेना के युद्धपोतों ने उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्र से कच्चा तेल ले जा रहे दो टैंकरों को सुरक्षित निकलने में मदद की थी। नौसेना के इस कदम से महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की हुई। नौसेना के अनुसार, भारत के आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य ने कच्चे तेल के टैंकर एमटी कम्पास और एमटी थालत्ता को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित पार कराया। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। भारतीय नौसेना के समुद्री योद्धा ऐसे संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध गतिविधियों की जांच, संकट में फंसे जहाजों की सहायता और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही नौसेना के युद्धपोत भी तत्काल कार्रवाई करते हैं। हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना ने समुद्री डकैती के खिलाफ कई सफल अभियान भी चलाए हैं। बीते दिनों ही अदन की खाड़ी में तैनात युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिकंद’ ने व्यापारिक जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल पर समुद्री डकैती के प्रयास के बाद तत्काल कार्रवाई की थी। नौसेना की टीम ने जहाज पर पहुंचकर उसकी पूरी तलाशी ली और यह सुनिश्चित किया कि वहां कोई संदिग्ध व्यक्ति मौजूद नहीं है। इसके बाद जहाज ने अपनी आगे की यात्रा फिर शुरू की। अभियान के दौरान हवाई निगरानी के लिए नौसेना के पी-8आई समुद्री गश्ती विमान को भी तैनात किया गया था। नौसेना की यह भूमिका केवल समुद्री डकैती से निपटने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य समुद्र में स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा और संकट के समय समुद्री यात्रियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है। अदन की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में भारतीय नौसेना की मौजूदगी भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को भी दर्शाती है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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