विश्वकर्मा पूजा पर क्यों होती है मशीनों और औजारों की पूजा? जानें धार्मिक महत्व

नई दिल्ली। इस साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह दिन भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों, वाहनों और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करने की परंपरा है।

भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है देवताओं का शिल्पकार

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए कई भव्य नगरों, महलों और दिव्य वस्तुओं का निर्माण किया था। उन्हें सोने की लंका, इंद्रपुरी और श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी जैसी अद्भुत संरचनाओं के निर्माण से जोड़ा जाता है। पुष्पक विमान का संबंध भी भगवान विश्वकर्मा से जोड़ा जाता है इसी कारण उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल का प्रतीक माना जाता है।

मशीनों और औजारों की क्यों होती है पूजा?

विश्वकर्मा पूजा में मशीनों और औजारों की पूजा के पीछे यही धार्मिक भाव जुड़ा है। कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को भगवान विश्वकर्मा की रचनात्मक शक्ति और शिल्प-कौशल का माध्यम माना जाता है। इसलिए इस दिन मशीनों, औजारों और वाहनों को साफ करके उनकी पूजा की जाती है धार्मिक विश्वास है कि भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और काम में सफलता तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

कैसे की जाती है विश्वकर्मा पूजा?

विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल, दुकान, कारखाने या कार्यालय की अच्छी तरह सफाई की जाती है। मशीनों, औजारों, वाहनों और अन्य उपकरणों को साफ कर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है पूजा में भगवान विश्वकर्मा को हल्दी, कुमकुम, चंदन और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद घी का दीपक जलाकर आरती की जाती है और फल-मिठाई का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ विश्वकर्मणे नमः’ मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक परंपरा है।

पूजा के दिन मशीन चलाने को लेकर क्या मान्यता है?

विश्वकर्मा पूजा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि पूजा के दिन मशीनों और औजारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालांकि काम की प्रकृति के कारण कई स्थानों पर इसे पूरी तरह संभव नहीं माना जाता, लेकिन धार्मिक रूप से इस दिन उपकरणों को विश्राम देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने की परंपरा रही है। साथ ही, मांस-मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों से दूर रहने, विवाद से बचने और मन में सकारात्मक भाव रखने की मान्यता भी जुड़ी है।

श्रम और तकनीक के सम्मान का पर्व

धार्मिक दृष्टि से विश्वकर्मा पूजा केवल मशीनों या औजारों की पूजा तक सीमित नहीं है। यह श्रम, शिल्प, तकनीक और निर्माण कार्य के प्रति सम्मान व्यक्त करने का पर्व भी माना जाता है। पूजा से पहले कार्यस्थल की सफाई और व्यवस्था करना भी इसी भावना का हिस्सा है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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