सेबी सीएएस के लागू होने के बाद अब डेरिवेटिव्स एक्सपायरी सेटलमेंट फ्रेमवर्क की कर रहा समीक्षा: चेयरमैन

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि नियामक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी सेटलमेंट फ्रेमवर्क से जुड़ी चिंताओं की समीक्षा कर रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में ‘कमोडिटी एंड कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (सीपीएआई) के 12वें इंटरनेशनल कन्वेंशन में बोलते हुए, पांडे ने कहा कि भारत को ऐसे बाजारों की जरूरत है जो कुशलतापूर्वक पूंजी जुटा सकें, जोखिम का प्रबंधन कर सकें और निवेशकों में भरोसा जगा सकें। ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ (सीएएस) फ्रेमवर्क शुरू होने के बाद, बाजार नियामक एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स सेटलमेंट की कीमतें तय करने से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रहा है। सीएएस फ्रेमवर्क को इसलिए लाया गया था ताकि सिर्फ वॉल्यूम-वेटेड औसत कीमतों पर निर्भर रहने के बजाय, एक ही इक्विलिब्रियम कीमत पर खरीद और बिक्री के ऑर्डर का मिलान करके दिन के आखिर में कीमत का बेहतर पता लगाया जा सके। सेबी के चेयरमैन ने कहा कि नियामक कैश मार्केट को ज्यादा गहरा और लिक्विड बनाना चाहता है, साथ ही सिक्योरिटीज उधार लेने और देने के मजबूत सिस्टम और हेजिंग व आर्बिट्राज के बेहतर मौके भी चाहता है, ताकि कीमत का पता लगाने की प्रक्रिया बेहतर हो सके और कैश व डेरिवेटिव्स सेगमेंट के बीच तालमेल मजबूत हो सके। कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में, सेबी नॉन-एग्रीकल्चरल कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ‘पोजीशन लिमिट’ की समीक्षा कर रहा है। इसका मकसद रिस्क मैनेजमेंट के स्टैंडर्ड्स से समझौता किए बिना लिक्विडिटी और मार्केट की गहराई को बढ़ाना है। चेयरमैन पांडे के अनुसार, सेबी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए कमोडिटी डिलीवरी में शामिल लोगों पर असर डालने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जुड़े मुद्दों पर स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत जारी रखेगा। भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर जोर देते हुए, उन्होंने बताया कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) को नॉन-एग्रीकल्चरल कमोडिटी डेरिवेटिव्स तक पहुंच दी गई है। इस कदम से फिजिकल मार्केट के लिए सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी में सुधार की उम्मीद है। सेबी प्रमुख ने कैपिटल मार्केट को आसान बनाने के मकसद से किए गए सुधारों का भी जिक्र किया। इनमें रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए संक्षिप्त और स्टैंडर्ड प्रोस्पेक्टस डिस्क्लोजर, बॉन्ड डिस्ट्रीब्यूशन इकोसिस्टम को मजबूत करने के उपाय, कॉर्पोरेट बॉन्ड, आरईआईटी और इनविट्स में निवेशकों के लिए ज्यादा लचीलापन और स्टॉक एक्सचेंज के जरिए ओपन-मार्केट शेयर बायबैक को फिर से शुरू करना शामिल है।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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