मजबूत घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के चलते वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान: यूएन रिपोर्ट

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग, बढ़ती विनिर्माण क्षमता और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के कारण भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जिसकी जीडीपी में 2026 (वित्त वर्ष 2027) में 7.3 प्रतिशत और 2027 (वित्त वर्ष 2028) में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। यूएनसीटीएडी की ‘व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र’ में कहा गया है कि कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता के बावजूद ये सभी कारक भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है। वर्ष 2026 में इसके 6.9 प्रतिशत और अगले वर्ष 5.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, ऊंची कीमतों और बढ़ती लागत के कारण पिछले वर्षों की तुलना में खपत वृद्धि की गति कुछ धीमी पड़ सकती है। यूएनसीटीएडी के अनुसार, विकासशील देशों की वृद्धि दर अब दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है, जहां कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास को आगे बढ़ा रही हैं, जिनमें भारत 7.3 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि के साथ सबसे आगे है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत जैसे बड़े देश क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। ये देश डिजिटल भुगतान तकनीक और डिजिटल अवसंरचना प्रणालियों को अन्य देशों के साथ साझा कर रहे हैं और तकनीकी सहयोग के जरिए क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। यूएनसीटीएडी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) मॉडल की विशेष रूप से सराहना की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी डीपीआई संरचना को साझा करने के लिए 23 देशों के साथ समझौते किए हैं और श्रीलंका तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित आठ देशों में तकनीकी सहयोग पहले से संचालित हो रहा है। जिनेवा में जारी इस रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अनुमान दिए गए हैं। यूएनसीटीएडी के अनुसार, 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2.9 प्रतिशत थी। इसके बावजूद वस्तुओं और सेवाओं के वैश्विक व्यापार में लगभग 4 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की औसत वृद्धि दर 4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो वर्ष 2025 के 4.7 प्रतिशत से कम है। यूएनसीटीएडी के कार्यवाहक महासचिव पेड्रो मैनुअल मोरेनो ने कहा कि ग्लोबल साउथ की उभरती अर्थव्यवस्थाएं क्षेत्रीय विकास के केंद्र के रूप में उभर रही हैं और व्यापारिक एकीकरण के साथ-साथ नए वित्तीय सहयोग तंत्र भी विकसित कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक व्यापार 35 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। 2026 में भी व्यापारिक मूल्य बढ़ रहे हैं, हालांकि इसका एक बड़ा कारण ऊर्जा झटकों के बीच कीमतों में वृद्धि है। क्षेत्रीय स्तर पर एशिया वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 59 प्रतिशत योगदान देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र रहेगा। इस दौरान भारत 7.3 प्रतिशत, चीन 4.5 प्रतिशत और इंडोनेशिया 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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