बॉलीवुड के ‘मदन चोपड़ा’ : ‘अंकुर’ से किया था डेब्यू, छह साल रहे बेरोजगार, फिर पिता के रोल से चमकी किस्मत

मुंबई। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे एक्टर हैं, जिन्होंने अपनी उम्र से कहीं बड़े किरदार निभाकर दर्शकों को हैरान किया है और इसी क्रम में अभिनेता दलीप ताहिल का नाम शुमार है। दलीप ताहिल उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं, जिन्होंने काफी कम उम्र में ही पिता का किरदार निभाया था। 80 और 90 के दशक में जब वो खुद यंग थे, तब उन्होंने कई बड़े सितारों के पिता का रोल किया था। ‘कयामत से कयामत तक’ में आमिर खान के पिता बने दलीप ताहिल ने कई फिल्मों में पिता बनकर ये साबित किया कि एक्टिंग में उम्र नहीं, टैलेंट मायने रखता है। 30 अक्टूबर 1952 को आगरा में जन्मे दलीप ताहिल का मूल नाम ‘दलीप घनश्याम ताहिलरामानी’ है। नैनीताल के मशहूर शेरवुड कॉलेज में दाखिले के समय उनके नाम को छोटा करके ‘दलीप ताहिल’ कर दिया गया। कॉलेज के बाद वे 1968 में मुंबई आए और बॉम्बे थिएटर ग्रुप में शामिल हो गए। वहां उन्होंने दिग्गज निर्देशक एलिक और पर्ल पदमसी के मार्गदर्शन में अभिनय की बारीकियां सीखीं। निर्देशक श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’ (1974) से उन्हें बड़े पर्दे पर पहला ब्रेक मिला। लेकिन फिल्म में उनका रोल बहुत छोटा कर दिया गया, जिससे उन्हें बड़ी पहचान नहीं मिल पाई। ‘अंकुर’ के बाद दलीप ताहिल को लगभग छह साल तक फिल्मों में कोई काम नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने पेट पालने के लिए मॉडलिंग की और विज्ञापनों के लिए जिंगल्स भी गाए। इसके बाद उन्होंने ‘शान’ (1980) सहित कई फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए, लेकिन मुख्य धारा में पहचान बनाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। इस दौर में वे टेलीविजन शो जैसे ‘बुनियाद’ और ‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ में भी नजर आए। शो ‘बुनियाद’ में उनकी बेहतरीन अदाकारी को देखकर ही मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक नासिर हुसैन बेहद प्रभावित हुए थे, जिसके बाद उन्होंने अभिनेता को अपने ऑफिस बुलाया और उन्हें अपनी आने वाली फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ में आमिर खान के पिता (जसवंत सिंह) का बेहद दमदार और भावुक रोल ऑफर किया। दिलचस्प बात यह है कि जब दलीप ताहिल ने इस फिल्म में आमिर खान के पिता का रोल स्वीकार किया, तब उनकी उम्र केवल 31 वर्ष थी, जबकि आमिर खान खुद करीब 23 वर्ष के थे। अभिनेता दलीप ताहिल का कहना है कि भले ही यह किरदार उनकी उम्र से बड़ा था, लेकिन उन्हें यह इतना दिलचस्प लगा कि उन्होंने तुरंत हां कर दी थी। शुरुआत में अभिनेता हीरो बनना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्हें कैरेक्टर रोल और निगेटिव (खलनायक) भूमिकाओं में सफलता मिली। साल 1993 में आई शाहरुख खान की फिल्म ‘बाजीगर’ में ‘मदन चोपड़ा’ के किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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