चंडीगढ़ में ब्रिक्स हेल्थ समिट शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल

चंडीगढ़। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में मंगलवार से चार दिवसीय ब्रिक्स ‘टीसीआईएम’ बैठक का आगाज हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इन महत्वपूर्ण हेल्थ मीटिंग्स में 21 देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। बैठक का मकसद पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने और वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, ब्रिक्स पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) पर मंत्रीस्तरीय बैठक मंगलवार को चंडीगढ़ में शुरू हुई। यह बैठक चार दिवसीय ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक के उद्घाटन दिवस पर आयोजित की गई। इसमें 21 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। हेल्थ समिट का मुख्य उद्देश्य ट्रेडिशनल (पारंपरिक) स्वास्थ्य प्रणालियों के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना, सदस्य देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना और स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका को मजबूत करना है। इसके अलावा, इंटीग्रेटिव मेडिसिन को बढ़ावा देना भी एजेंडे में है। इसके तहत आधुनिक इलाज के साथ-साथ पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ मिलाकर काम करने की रणनीति तैयार की जाएगी। इतना ही नहीं, ब्रिक्स देश मिलकर एक ऐसा टिकाऊ और इनोवेटिव हेल्थ सिस्टम बनाने पर विचार करेंगे, जो भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य संकट या महामारी का मजबूती से सामना करने में सक्षम हो। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसके जरिए ब्रिक्स देश डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिसर्च और महामारी से निपटने की तैयारियों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर मंत्रणा करेंगे। पीजीआईएमआर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मौजूदगी के कारण चंडीगढ़ को इस अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य चर्चा का अहम केंद्र माना जा रहा है। बैठक में भाग लेने वाले देशों से टीसीआईएम पर ब्रिक्स एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। इससे अनुसंधान, क्लिनिकल वैलिडेशन, डिजिटल ज्ञान-साझाकरण, नियामकीय समन्वय (रेगुलेटरी हार्मोनाइजेशन) और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक में ब्रिक्स स्वास्थ्य एजेंडा के तहत तय नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हुई प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। इनमें निवारक स्वास्थ्य सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य, महामारी से निपटने की तैयारी, तपेदिक (टीबी) अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा, दवाओं के लिए नियामकीय समन्वय तथा सामाजिक और आर्थिक कारणों से जुड़ी बीमारियों से निपटने की रणनीतियां शामिल हैं।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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