चीन ने किया लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण, क्षेत्रीय देशों ने जताई चिंता

बीजिंग। चीन ने सोमवार को दक्षिण प्रशांत महासागर में अपनी एक रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की नौसेना के अनुसार यह परीक्षण उसके वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण का नियमित हिस्सा था और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं नियमों के अनुरूप अंजाम दिया गया। फ्रांस के समाचार टेलीविज़न नेटवर्क फ्रांस24 और चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने पीएलए नौसेना के हवाले से बताया कि दोपहर 12:01 बजे डमी वॉरहेड से लैस रणनीतिक मिसाइल को प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र की ओर दागा गया, जो पूर्व निर्धारित समुद्री इलाके में जाकर गिरी। चीन ने कहा कि यह परीक्षण किसी देश या विशेष लक्ष्य के खिलाफ नहीं था और संबंधित देशों को पहले से इसकी सूचना दे दी गई थी। उधर, चीन के इस परीक्षण को लेकर क्षेत्रीय देशों ने चिंता और विरोध जताया। न्यूजीलैंड सरकार ने कहा कि उसे प्रस्तावित लॉन्च की जानकारी परीक्षण से केवल कुछ घंटे पहले ही दी गई थी। सरकार ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र में किया गया, जिसकी स्थापना 1986 की रारोटोंगा संधि के तहत हुई थी। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह की सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद चीन ने बेहद कम समय पहले सूचना देकर परीक्षण कर दिया। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के इस कदम पर आपत्ति जताई। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि उनका देश इस तरह के मिसाइल परीक्षण को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती मानता है। उन्होंने यह बयान फिजी में उस समय दिया जब ऑस्ट्रेलिया और फिजी ने प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से नई रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए। उल्लेखनीय है कि चीन ने इससे पहले भी प्रशांत क्षेत्र में लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण प्रशांत में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे सकती हैं।

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