मुंबई। पंजाबी सिंगर और एक्टर परमिश वर्मा इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। पत्नी गीत ग्रेवाल से तलाक की पुष्टि करने के बाद परमिश ने अब सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट शेयर किया है, जिसने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है। इस बार उन्होंने अपने पिता के साथ तस्वीरें साझा की हैं और जिंदगी में नेगेटिविटी को जगह न देने का संदेश दिया है। परमिश ने अपने पिता को अपना हीरो बताते हुए उनके जन्मदिन के जश्न की झलक दिखाई। परमिश वर्मा ने इंस्टाग्राम पर अपने पिता के जन्मदिन की कुछ तस्वीरें शेयर कीं। इन तस्वीरों में वह अपने पिता, मां और भाई सुखन वर्मा के साथ नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में परमिश अपने पिता को केक खिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी तस्वीरों में वह अपनी मां और परिवार के साथ खुशहाल पल बिताते नजर आ रहे है। तस्वीरों के साथ परमिश ने पंजाबी में लिखा, ”नेगेटिविटी दी था जिदगी च जीरो, नी मैं किससे दा नी फैन, मेरा बापू मेरा हीरो।” यानी ”जिंदगी में नेगेटिविटी के लिए कोई जगह नहीं है और मैं किसी और का फैन नहीं हूं, क्योंकि मेरे पिता ही मेरे हीरो हैं।” दरअसल, इससे पहले परमिश ने सोशल मीडिया पर एक लंबा बयान जारी कर गीत ग्रेवाल से अपने तलाक की पुष्टि की थी। उन्होंने बताया था कि इस समय उनकी जिंदगी में एक महिला मौजूद है। उनका यह बयान पिछले कई हफ्तों से चल रही अफवाहों और सोशल मीडिया की चर्चाओं के बीच आया। परमिश का नाम एक्ट्रेस और मॉडल हरमन बराड़ के साथ जोड़ा जा रहा था। दोनों के कथित रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बातें हो रही थीं। इसी दौरान परमिश पर अपनी पूर्व पत्नी गीत ग्रेवाल के साथ बेवफाई करने के आरोप भी लगाए जा रहे थे। इन आरोपों और लगातार हो रही ट्रोलिंग के बीच परमिश ने कहा, ”एक पुरुष कई बार लोगों के लिए आसान निशाना बन जाता है। जेंडर के आधार पर कहानी बना लेना और फिर भीड़ के सामने एक व्यक्ति को दोषी ठहरा देना बहुत आसान होता है। मैं इस साइकोलॉजी को समझता हूं और बिना किसी नाराजगी के इस बोझ को स्वीकार करता हूं।” सिंगर ने अपने मुश्किल दौर का जिक्र करते हुए कहा, ”जब मैं डूब रहा था, तब मुझे बचाने के लिए कोई नहीं आया। मैंने अपने हालात का सामना खुद किया, अपने दर्द को सहा और फिर दोबारा खड़े होना सीखा। पुरुष होने का मतलब सिर्फ मजबूत दिखना नहीं है। अपनी पूर्व पत्नी का सम्मान करना, अपनी जिंदगी में मौजूद महिला का सम्मान करना और कड़वाहट से बचना भी जरूरी है।” उन्होंने कहा, ”भीड़ का हिस्सा बनकर किसी एजेंडे को आगे बढ़ाना, ध्यान खींचने या पैसे के लिए दूसरों के पीछे चलना और फिर उसे नैतिकता का नाम देना सही नहीं है। मैं जानता हूं कि मैं कौन हूं और किस तरह का इंसान हूं। मैं भीड़ के साथ झुककर तालियां पाने के बजाय अपने फैसलों पर मजबूती से खड़े रहने के कारण नफरत झेलना पसंद करूंगा। जो मैं आज हूं, मुझे उस पर गर्व हैं।”











