सतीशन सरकार का बड़ा प्लान, वेली को ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म के मेगा हब के तौर पर करेगी विकसित

तिरुवनंतपुरम। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित टूरिस्ट विलेज वेली को हमेशा से ही अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा मिला है। अब, सतीशन सरकार इस फायदे को ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म के बड़े मौके में बदलना चाहती है। तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास और मशहूर शंकुमुघम बीच के नजदीक स्थित वेली, शहर के हवाई, रेल, सड़क और जल परिवहन नेटवर्क को जोड़ने वाले एक गेटवे के तौर पर उभरने के लिए तैयार है। वेली इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाले ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर सीपी जॉन ने आने वाले वर्षों में इसे केरल के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत पहले ही की जा चुकी है। बुधवार को ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर जॉन ने वेली टूरिज्म विलेज से एक नई पैसेंजर-कम-टूरिज्म बोट सर्विस का उद्घाटन किया, जिससे पार्वती पुथनार से कडिनमकुलम झील तक एक जल मार्ग खुल गया। यह सर्विस सिर्फ बोट राइड से कहीं ज्यादा है। इसका मकसद एक पुराने जल मार्ग को रोजमर्रा के इस्तेमाल में वापस लाना है और साथ ही तट और बैकवाटर्स के किनारे टूरिज्म का एक नया अनुभव देना है। 24 सीटों वाली सोलर-पावर्ड बोट वेली और कडिनमकुलम के बीच लगभग 14 किलोमीटर की दूरी दो घंटे में तय करती है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर जॉन वेली के लिए एक बड़ी तस्वीर देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोवलम से वर्कला तक फैले टूरिज्म सर्किट में एक अहम पॉइंट बन सकता है। एयरपोर्ट और कोचुवेली रेलवे स्टेशन के पास होने की वजह से इस इलाके को एक खास फायदा मिलता है। हवाई जहाज से आने वाला कोई यात्री लगभग उसी इलाके से शहर के सड़क, रेल और जल मार्गों से जुड़ सकता है। मिनिस्टर ने इस जल मार्ग के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया, जिसे 202 साल पहले रानी पार्वती बाई के शासनकाल में शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि ध्यान सिर्फ निर्माण कार्यों पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा जल मार्गों के प्रभावी इस्तेमाल पर भी होना चाहिए। नहरें तभी साफ रह सकती हैं जब उनका लगातार इस्तेमाल हो। अब चुनौती इन जल मार्गों को फिर से उपयोगी बनाने की है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर जॉन ने कहा, “सिर्फ नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना ही काफी नहीं है।” उन्होंने मौजूदा नहरों को साफ और चालू रखने के लिए उनके नियमित इस्तेमाल पर जोर दिया।

Ayush Sharma
Author: Ayush Sharma

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