जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में भगवान श्रीजगन्नाथ से जुड़ी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा इन दिनों श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है। रियासत कालीन बस्तर गोंचा पर्व 2026 देव स्नान चंदन जात्रा पूजा विधान 29 जून से प्ररारंभ हो चुका है, शताब्दियों से (618 वर्षों) चली आ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंदन जात्रा पूजा विधान के पश्चात भगवान श्रीजगन्नाथ का 15 दिवसीय अनसर काल की अवधि में अस्वस्थ होते हैं तथा भगवान के अस्वथता के हालात में दर्शन वर्जित होते हैं । भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और बलभद्र स्वामी का श्रीमंदिर में इन दिनों अनसर काल 15 जुलाई तक जारी रहेगा। इस दाैरान भगवान श्रीजगन्नाथ के स्वास्थ्य लाभ के लिए औषधियुक्त भोग का अर्पण 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सेवादारों एवं पंडितों के द्वारा किया जा रहा है । औषधियुक्त भोग के अर्पण के पश्चात इसे श्रृद्धलुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है । विशेष औषधियुक्त प्रसाद का पूण्य लाभ श्रृद्धालु अनसर काल के दौरान श्रीजगन्नाथ मंदिर में पहुचकर प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन दर्शन वर्जित होगा।











